गुरुग्राम। बाइक की रफ्तार और खुली सड़क का रोमांच महिला राइडरों को खूब आकर्षित करता है लेकिन मिलेनियम सिटी की सड़कों पर यह शौक कई बार डर में बदल जाता है। कहीं खराब सड़क और गड्ढे चुनौती बनते हैं तो कहीं दूसरे वाहन चालकों की मनमानी और युवकों की टिप्पणियां।
महिला राइडरों के मुताबिक, कुछ घटनाओं के बाद उन्हें अकेले राइड करने से बचना पड़ता है। कई बार अपनी पहचान तक छुपानी पड़ती है। उनका कहना है कि सड़क पर महिला को देखकर टिप्पणी करना, पीछा करना या उसे असहज करना सामान्य व्यवहार नहीं माना जा सकता है।
सड़क पर बाइक चलाना महिलाओं के लिए भी उतना ही सामान्य होना चाहिए, जितना पुरुषों के लिए। लेकिन गुरुग्राम की महिला बाइक राइडरों के अनुभव बताते हैं कि उन्हें सड़क पर सिर्फ ट्रैफिक से नहीं, बल्कि लोगों के व्यवहार से भी जूझना पड़ता है।
महिला राइडरों के अनुसार, कई बार युवकों की टिप्पणियां, बातचीत के बहाने रोकने की कोशिश और पीछा किए जाने जैसी घटनाएं उन्हें असहज करती हैं।
यही वजह है कि कुछ राइडर अकेले सफर करने से बचती हैं और समूह में निकलना ज्यादा सुरक्षित मानती हैं। उनका कहना है कि महिलाओं के लिए सुरक्षित सड़क का मतलब सिर्फ ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर होना नहीं, बल्कि सड़क पर सम्मान और जिम्मेदार व्यवहार भी है।क