बिना घोंसला बनाए ही अपना जीवन व्यतीत करता है
संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखनगर। सुल्तानपुर बर्ड सेंचुरी में छह साल बाद दुर्लभ पक्षी इंडियन नाइटजार को फिर से देखा गया है। यह पक्षी अपनी अनोखी आदतों और रहस्यमयी जीवनशैली के लिए जाना जाता है क्योंकि यह बिना घोंसला बनाए ही अपना जीवन व्यतीत करता है। स्थानीय बर्ड गाइड कृष्ण कुमार शर्मा ने हाल ही में इस पक्षी को देखा। उन्होंने बताया कि आखिरी बार करीब पांच से छह साल पहले नाइटजार को यहां देखा गया था। यह पक्षी चपका से काफी मिलता-जुलता है और इसकी मौजूदगी बर्ड सेंचुरी के पारिस्थितिक संतुलन का सकारात्मक संकेत है।
इंडियन नाईटजार एक ऐसा पक्षी है जो पूरी रात सक्रिय रहता है। सूरज ढलते ही यह भोजन की तलाश में उड़ता है और सुबह होने पर अपने ठिकाने पर लौट आता है। दिन में यह आमतौर पर शांत और छिपा रहता है। शोरगुल इसे बिल्कुल पसंद नहीं, इसी कारण मानव गतिविधियों और जंगलों में बढ़ते दखल से इसकी संख्या तेजी से घट रही है। वन्य प्राणी निरीक्षक चरण सिंह बताते हैं कि पिछले दो दशकों में इस प्रजाति की आबादी में भारी गिरावट देखी गई है। अब यह पक्षी सीमित इलाकों में ही दिखाई देता है, खासकर शांत और कम प्रकाश वाले जंगलों में।
इंडियन नाइटजार के पंख भूरे, ग्रे और काले रंगों के मिश्रण से बने होते हैं, जिससे यह अपने परिवेश में आसानी से घुलमिल जाता है। उसके पंखों के नीचे हल्की सफेद धारियां होती हैं। यह प्रायः चट्टानों, टीलों, पत्थरों या कैर के झाड़ियों में अपना ठिकाना बनाता है। इसकी रंगत पेड़ों और मिट्टी के समान होने के कारण इसे पहचान पाना बेहद कठिन होता है।