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Gurugram News: राजेंद्रा पार्क थाना पुलिस ने नए कानूनों के तहत पहला केस दर्ज किया

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अमर उजाला ब्यूरो
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गुरुग्राम। नए कानूनों के तहत राजेंद्रापार्क थाना पुलिस ने नौ साल की बच्ची हत्या मामले को दर्ज किया है। इसके अलावा दूसरा केस सड़क हादसे में चार लोगों की मौत में दर्ज किया गया है।
पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि एक जुलाई से देश में लागू हुए कानूनों के तहत गुरुग्राम के पुलिस थाना राजेन्द्रा पार्क में धारा 103(1), 238 (ए), 305, 62 बीएनएस(भारतीय न्याय संहिता) अंकित किया गया है। जिले नए कानूनों के तहत गुरुग्राम में यह पहला केस दर्ज हुआ है। दूसरी ओर फर्रुखनगर थाना पुलिस ने सड़क हादसे में हुए चार लोगों की मौत मामले को नए कानूनों के तहत कार्रवाई की है। दूसरी ओर गुरुग्राम पुलिस द्वारा विभिन्न स्थानों पर 3 नए कानूनों के संबंध में जानकारी देकर लोगों को जागरूक किया।
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देश में एक जुलाई से भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के स्थान पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और साक्ष्य अधिनियम के स्थान पर भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए ) लागू की गई है। अब नए कानूनों के अनुसार पुलिस प्रक्रियाएं लागू होंगी। इस पर पुलिस आयुक्त विकास अरोड़ा के निर्देशानुसार गुरुग्राम के सभी थाना प्रबंधकों, पुलिस चौकी प्रभारियों सहित गुरुग्राम पुलिस की विभिन्न टीमों ने लोगों के बीच जाकर लागू हुए कानूनों के बारे में जानकारी देकर जागरूक किया। इस दौरान पुलिस टीमों द्वारा लोगों को पहले और लागू रहे कानूनों के बीच मुख्य भिन्नताओं/विशेषताओं के बारे में जानकारी देकर जागरूक किया। कुछ नई धाराओं को जोड़ा गया है और कुछ धाराओं में सजा में भी बदलाव किया गया है। नए कानून में दंड के स्थान पर न्याय पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया गया है। इस दौरान यह भी बताया गया कि 30 जून के बाद घटित होने वाली वारदातों के सम्बन्ध में प्राप्त होने वाली शिकायतों पर नए कानूनों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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सात साल से कम की सजा वाले मामले में आरोपी की गिरफ्तारी से पहले एसीपी से लेनी होगी अनुमति
नए कानून को लागू करने के पहले दिन पुलिस अधिकारियों के साथ पुलिस आयुक्त विकास अरोड़ा ने बैठक की है। बैठक के दौरान उन्होंने सभी डीसीपी को कहा कि वह उन मामले पर नजर रखे। जिसमें सजा का प्रावधान 5 साल तक हो। अगर मामला दर्ज होता है और आरोपी की गिरफ्तारी की जानी है। जांच अधिकारी अपने एसीपी से अनुमति जरूर लेगा।
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