टीम के निर्देशों और आइडियाज के अनुसार आगे का कार्य किया जाएगा, अरावली चट्टान काटकर 4.69 किलोमीटर लंबी बनाई जा रही है सुरंग
मोहम्मद शाहिद मेवाती।
तावड़ू। प्रदेश के नूंह जिले में 67 मीटर गहराई में मिट्टी खोदाई व अरावली चट्टान काटकर 4.69 किलोमीटर लंबी एक अनोखी सुरंग का निर्माण किया जा रहा है। इसी कड़ी में अब तक करीब 100 मीटर की खोदाई की जा चुकी है। यह सुरंग कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे के साथ हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर परियोजना का अहम हिस्सा है। इस सुरंग के निर्माण पर 12 करोड़ रुपये की लागत आ रही है और इसे अत्याधुनिक तकनीकों व सभी आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए तैयार किया जा रहा है। कॉरिडोर के काम को लेकर मंगलवार को दूसरे देशों से 12 विशेषज्ञों की टीम ने कार्यस्थल के सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की। उनके निर्देशों और बताए गए आइडियाज के अनुसार आगे का कार्य किया जाएगा।
परियोजना के वरिष्ठ रेल अधिकारियों का कहना है कि लंबाई और डिजाइन के अनुसार यह सुरंग करीब साढ़े चार किलोमीटर किलोमीटर लंबी होगी। इसमें 1.1 किलोमीटर अरावली की चट्टान को काटकर औेर 3.6 मिटटी की खोदाई कर बनाया जा रहा है। 5,618 करोड़ रुपये की यह पूरी परियोजना है। जिसका पांचवा हिस्सा मात्र टनल निर्माण पर खर्च किया जा रहा है। ट्रैक के लिए अलग-अलग सुरंगे बनाई जा रही हैं। दोनों सुरंग 30 फीट ऊंची और 30 फीट चौड़ी होगी। सुरंग का डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है ताकि एक ट्रैक पर कोई परेशानी हो तो दूसरी ट्रैक पर आवागमन बाधित ना हो।
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पैसेंजर के साथ मालगाड़ियां भी संचालित
डबल ट्रैक पर पैसेंजर के साथ मालगाड़ियां भी संचालित होगी। जिसमें पैसेंजर ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 160 किलोमीटर प्रति घंटे तथा मालगाड़ी की रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे होगी। फिलहाल धुलावट छोर पर ही 24 घंटे मेें 80 के करीब, इंजीनियर व विशेषज्ञ तकनीकी सावधानियों के साथ निर्माण कार्य में जुटे है। निर्माणाधीन सुरंग में जाने वालों की सुरक्षा को लेकर सभी औपचारिकताएं पूरी की जाती है। इस दौरान पर्यावरण और सुरक्षा मानकों का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर का उद्देश्य क्षेत्र में रेल परिवहन को तेज और प्रभावी बनाना है।
यातायात हो सुगम और माल ढुलाई में आएगी तेजी
यह सुरंग इस कॉरिडोर का प्रमुख हिस्सा होगी, जिससे यातायात सुगम होगा और माल ढुलाई में तेजी आएगी। यह रेल कॉरिडोर केएमपी एक्सप्रेसवे के साथ समांतर होगा, जिससे सड़क और रेल यातायात दोनों में सुधार होगा। परियोजना हरियाणा के औद्योगिक और परिवहन नेटवर्क को मजबूत बनाने के लिए बनाई जा रही है। यह परियोजना दिल्ली और उसके आस-पास के क्षेत्रों में ट्रैफिक दबाव को कम करने में सहायक होगी। निर्माण कार्य तेज गति से चल रहा है और इसे नियत समय में पूरा करने का लक्ष्य है। यह सुरंग न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि हरियाणा में बुनियादी ढांचे के विकास के एक नए अध्याय की शुरुआत भी करेगी। यह परियोजना राज्य और देश की आर्थिक प्रगति में योगदान देने के साथ-साथ क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा देगी।
मेवात के धुलावट गांव होगा में बनेगा रेलवे स्टेशन
हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर की सुरंग के नजदीक इस परियोजना का तावडू उपमंडल के गांव धुलावट में पहला और एकमात्र रेलवे स्टेशन बनेगा। मेवात के लिए रेल की मांग पुरानी है है लेकिन केएमपी के साथ प्रस्तावित ऑर्बिटल रेलवे कॉरिडोर परियोजना से यह मांग कुछ हद पूरी होगी। इससे क्षेत्र के लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार भी मिलेगा।
परियोजना के निर्माण कार्य को पूरा करने का ठेका रेल विकास निगम लिमिटेड के पास है। इसी में सुरंग निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। वर्ष 2023 में निर्माण कार्य शुरू हुआ था, जिसे 1460 दिन में पूरा करने का लक्ष्य है। सुरंग निर्माण के दौरान विशेषज्ञों की टीमें लगातार मौके पर निरीक्षण करने जाती हैं। सुरक्षा की दृष्टि से सभी जरूरी मानकों का पालन किया जा रहा है - मुख्य परियोजना प्रबंधक नरेश कुमार ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर।
फोटोः आर्बिटल रेल कारिडोर की सुरंग निर्माण पर चलता कार्य।