गुरुग्राम। पुलिस प्रशासन ने ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों में कार्रवाई करते हुए वर्ष 2022 में अब तक करीब दो करोड़ रुपये की धनराशि वापस दिलाई है। एसीपी क्राइम प्रीतपाल ने कहा है कि इसमें संबंधित बैंक प्रबंधन का भी सहयोग रहा। ग्राहकों को डिजिटल लेनदेन के साथ साइबर सुरक्षा नियमों से भी जागरूक कराना होगा। ऑनलाइन धोखाधड़ी की खबर तत्काल साइबर क्राइम सेल को दें ताकि जांच प्रक्रिया जल्द शुरू हो सके। उन्होंने बैंकर्स से कहा कि वह संदिग्ध खातों के लेनदेन पर नजर रखें। ऐसे खातों की केवाईसी कराएं व पुलिस जानकारी दें।
एसीपी शुक्रवार को जिला उद्यान विभाग के प्रशिक्षण सभागार में जिला स्तरीय सुरक्षा समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बिना सुरक्षाकर्मी वाले एटीएम बूथ एक गंभीर मुद्दा हैं। अधिकांश एटीएम में सुरक्षाकर्मी नहीं हैं। कई स्थानों पर सुरक्षा उपकरणों में खामियां हैं। इससे बैंक को आर्थिक नुकसान होता है और ग्राहकों के बीच उसकी छवि खराब होती है। सभी बैंक एटीएम पर सुरक्षाकर्मी की तैनाती के साथ ही सुरक्षा उपकरण ठीक रखें। ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामलों कई बार छानबीन के दौरान बैंक प्रबंधन की ओर से साक्ष्य उपलब्ध करवाने में ढिलाई बरती जाती है। इससे न केवल जांच प्रभावित होती है बल्कि अपराधी की धरपकड़ में भी मुश्किलें आती हैं, इसलिए बैंक प्रबंधन साक्ष्य देने में त्वरित कार्रवाई करें। अग्रणी जिला प्रबंधक प्रहलाद रॉय गोदारा ने कहा कि सभी बैंक व एटीएम में लगे सुरक्षा उपकरण 24 घंटे कार्य करने की अवस्था में हों। सभी बैंक पुलिस द्वारा मांगी जानकारी अथवा साक्ष्य जल्द से जल्द उपलब्ध करवाएं। इस बैठक में साइबर क्राइम के एसएचओ बिजेंद्र कुमार सहित केनरा बैंक की क्षेत्रीय प्रमुख आराधना त्रिवेदी, आरबीआई चंडीगढ़ के एजीएम विक्रम ढांडा, नाबार्ड से क्लस्टर हेड विनय कुमार त्रिपाठी व बैंकों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।