गुरुग्राम। गाजियाबाद की संतोष यूनिवर्सिटी के संचालक व उसके परिजनों के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के मामले में डीएलएफ फेज-तीन की पुलिस टीम गिरफ्तार आरोपी संतोष मंगलम को लेकर चेन्नई गई है, जहां पर उसकी ओर से तैयार किए गए फर्जी रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है। इसके साथ ही इस बात का खुलासा हुआ है कि प्रताप विहार के 272 कमरों के दस्तावेज सिक्योरिटी के रूप में कंपनी के पास रखे गए थे। उसके कॉमन एरिया को जीडीए ने बेचने की इजाजत नहीं दी थी। इसके साथ ही तीन साल पहले 45 करोड़ का चेक दिया था, जो बाउंस हो गया था।
पीएम फिनकैप लिमिटेड के निदेशक राजेश गुलाटी ने दो जुलाई को डीएलएफ फेज-तीन थाना पुलिस को संतोष यूनिवर्सिटी के पदाधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दी थी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि मैसर्स एसीबी (इंडिया ग्रुप) की नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनी से मार्च 2015 में रसूखदारी का प्रमाण देते हुए राजनीतिक और अन्य हस्तियों के साथ फोटो दिखाकर व अन्य साजिश के तहत उनकी कंपनी से 35 करोड़ रुपये का ऋण लिया गया था। इस पर 24 प्रतिशत ब्याज दर देने को कहा था। इसके साथ ही जिन कमरों को बेचकर कंपनी पैसा लेना चाहती थी, उसे भी जीडीए ने बेचने के दौरान कॉमन एरिया को पार्ट में बेचने से मना कर दिया था।
35 करोड़ के गबन के मामले में पुलिस टीम आरोपी संतोष मंगलम को लेकर चेन्नई गई है, जहां पर उसने फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे। इसके साथ ही उसकी ओर से हुए अन्य घोटालों की भी पुष्टि हुई है। टीम की वापसी के बाद अन्य खुलासा किया जाएगा।
-करण गोयल, एसीपी डीएलएफ, गुरुग्राम