- अभियान चलाकर शहर को सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त करने की कोशिश
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। आसान नहीं है प्लास्टिक बैग से मुक्ति लेकिन शहर के कई उत्साही लोग व संगठन इसके लिए लगातार प्रयासरत हैं। प्लास्टिक बैग से मुक्ति, सिंगल यूज प्लास्टिक जैसे प्रदूषणकारी चीजों के दुष्प्रभावों के बारे में लोगों को बता रहे हैं। आज अंतरराष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्ति दिवस पर ऐसी ही लोगों के बारे में पढ़ें जो पर्यावरण को बचाने के लिए लगातार संघर्ष कर रह हैं। साथ ही, लोगों को बता रहे हैं कि प्लास्टिक कितना खतरनाक है।
रुचिका ने शुरू कराया थ्री बी का फंडा
प्रदूषण मुक्त शहर बनाने के लिए रुचिका सेठी ने थ्री बी का फंडा का नारा दिया। यह एक अभियान है, जिसमें लोगों को इस बात के लिए प्रेरित किया जा रहा है कि आप कहीं बाहर निकले तो थ्री बी यानी बोतल, कपड़े या जूट का बैग और बॉक्स लेकर चलें ताकि डिस्पोजल का प्रयोग नहीं करना पड़े। अभी भी कई सोसाइटियों में लोग इसे अपना रहे हैं। बच्चों ने इसके पोस्टर तैयार किए। व्हाई वेस्ट योअर वेस्ट और सिटिजन फॉर क्लीन एयर जैसे पर्यावरण संरक्षण और कूड़ा प्रबंधन जागरूकता का अभियान शहर के सेक्टरों और सोसाइटियों के आरडब्ल्यूए के बीच इन्होंने चलाया। इसी अभियान से थ्री बी का फंडा निकला। यह समूह उन रेस्त्रां और सामानों की डिलीवरी करने वाले व्यवसायों को भी प्रोत्साहित करता है, जो प्लास्टिक पैकिंग में सामान नहीं देते। रोजमर्रा की जिंदगी में प्लास्टिक का प्रयोग कम करने के लिए रुचिका लगातार जागरूकता करती रही हैं।
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कपड़े के थैले का चलाया अभियान
सेक्टर 54 स्थित सनसिटी में रहने ममता अग्रवाल ने कई साल पहले सनसिटी में स्थित दुकानों और सोसाइटी के गेट पर डिब्बे में कपड़े के थैले रखकर सोसाइटी में प्लास्टिक बैग को प्रतिबंधित किया था। ममता बताती हैं कि इसके साथ उन्होंने छह और सोसाइटियों में यह अभियान चलाया। इसके साथ वंचित परिवारों की महिलाओं को थैला बनाने का काम सौंपा गया। ममता अग्रवाल कहती हैं कि जब तक सरकार प्लास्टिक बैग को बंद नहीं करेगी, लोग सुविधा देखते हुए इसका प्रयोग करते रहेंगे। हालांकि रिसाइकिल चीजों के प्रयोग का उनका अभियान सफल रहा। ममता अग्रवाल बताती हैं कि छह-सात सोसाइटियों में चैरिटी बैग रखे हैं, जहां लोग पुराने कपड़े और अन्य चीजें दे देते हैं। इसे एक चैरिटी स्टोर में दे दिया जाता है। जिन कपड़ों के थैले बन सकते हैं, उनके थैले बनाकर बांटे जाते हैं।
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कपड़े के थैले के प्रयोग को प्रोत्साहन
सेक्टर 49 स्थित नाइल सोसाइटी की पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष जागृति जगत ने सिंगल यूज प्लास्टिक फ्री सोसाइटी बनाने की कोशिश की है। जागृति बताती हैं कि सोसाइटी में स्थित दुकानों में प्लास्टिक का थैला नहीं मिलता है। वे बताती है कि जब वे आरडब्ल्यूए अध्यक्ष थीं तब उन्होंने सोसाइटी के भीतर भी प्लास्टिक का थैला लेकर आने पर प्रतिबंध लगाया था, बहुत सारे लोग इसे अभी भी अपना रहे हैं। फिलहाल वे सोसाइटी के लोगों ने पुरानी चादरें, परदे आदि एकत्र कर उससे थैले बनवाकर सोसाइटी के स्टाफ के बीच समय-समय पर बंटवाती हैं ताकि वे भी प्लास्टिक बैग का प्रयोग नहीं करें।
एक कपड़े का थैला चार प्लास्टिक बैग से मुक्ति
सांसें हो ही है कम, आओ पर्यावरण बचाएं हम... इस नारे के साथ धर्मवीर तनेजा के साथ दीपक कटारिया ने प्लास्टिक बैग मुक्त शहर का अभियान चला रखा है। दीपक ने अबतक जगह-जगहों पर लाखों की संख्या में कपड़े के थैले बांटे हैं। वे बताते हैं कि एक कपड़े के थैले से चार प्लास्टिक बैग से मुक्ति मिलती है। मंदिरों, संस्थानों, सार्वजनिक स्थलों पर उन्होंने थैले बंटवाए हैं।