गुरुग्राम। 35 दिन से ज्यादा समय से राजीव चौक पर चल रहे किसानों के अनिश्चितकालीन धरने में किसानों की संख्या काफी बढ़ चुकी है। पहले सिर्फ शहरी इलाके व आसपास के ही किसान इसमें शामिल हो रहे थे, लेकिन अब गांवों से भी किसान धरने में पहुंच रहे हैं। पटौदी, मानेसर, सोहना व आसपास के इलाकों के गांवों के किसान इसमें शामिल हो रहे हैं।
धरनास्थल पर सुबह 11 से शाम 4 बजे तक लंगर लगातार चलता है। संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्यों ने बुधवार को कहा कि सरकार किसानों का उत्पीड़न कर रही है। सरकार ने किसानों के धरनास्थल के आसपास के इलाकों की बिजली काट दी है और पानी की सप्लाई भी रोक दी गई है। अमानवीय व्यवहार करके सरकार किसान आंदोलन को कुचलना चाहती है, लेकिन किसान तानाशाही के आगे झुकने वाले नहीं हैं।
किसान नेता विजय यादव ने कहा कि सरकार ने इंटरनेट सेवाएं बंद कर रखी हैं, जिससे आम आदमी को असुविधा हो रही है। शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करना प्रत्येक देशवासी का संवैधानिक अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि किसान शांतिपूर्वक धरना-प्रदर्शन कर सकते हैं। इसके बावजूद, सरकार दमनकारी नीति अपनाकर किसान विरोधी मानसिकता का परिचय दे रही है।
‘सरकार छोड़े तानाशाही रवैया’
संयुक्त किसान मोर्चा गुरुग्राम के अध्यक्ष चौधरी संतोख सिंह ने कहा कि किसानों का आंदोलन अब जनांदोलन बन चुका है। इसे देश के हर हिस्से से समर्थन मिल रहा है। सरकार तानाशाही रवैया छोड़ दे और किसानों के साथ बातचीत करके काले कानूनों को रद्द कर दे। इस दौरान जसबीर ठाकरान, भारती देवी, उषा सरोहा, नवनीत रोज, बलकेश बाल, पूर्व पार्षद रविंदर कटारिया आदि मौजूद रहे।