सेक्टर-21 को बसे 43 साल हो गए, दिल्ली रोड से नहीं है कोई रास्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सेक्टर-21, 22 और 23 के निवासी पिछले 43 वर्षों से भूमि अधिग्रहण के लंबित मामले के कारण नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 11 जुलाई 2013 को (सीडबल्यूपी 651/1984) में स्पष्ट आदेश दिया था कि सार्वजनिक सेवाओं के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जा सकता है। हालांकि मामला सर्वोच्च न्यायालय में है, लेकिन वहां से कोई स्टे (स्थगन) नहीं है, फिर भी हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) विकास कार्य नहीं कर रहा है।
अधिग्रहण न होने से सेक्टर-21 का ओल्ड दिल्ली रोड से सीधा संपर्क नहीं है। खाली पड़ी 28 एकड़ जमीन पर अवैध झुग्गियां, कचरा डंपिंग और भूजल का अवैध दोहन हो रहा है, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। निवासियों की मांग है कि इस जमीन पर माइक्रो एसटीपी, बिजली सबस्टेशन और कंपोस्टिंग प्लांट जैसी आवश्यक सुविधाएं विकसित की जाएं। प्रशासनिक लापरवाही के कारण हजारों परिवार बुनियादी सुविधाओं और बेहतर कनेक्टिविटी से वंचित हैं।
सीएम को 58 बार दे चुके हैं ज्ञापन
मैं सार्वजनिक उपयोग की भूमि के अधिग्रहण मामले में हरियाणा के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, एचएसवीपी को 58 बार ज्ञापन व रिमाइंडर पहले भेज चुका हूं। - प्रकाश लांबा, अध्यक्ष आरडब्ल्यूए, सेक्टर-21
हमारे सेक्टर का मुख्य सड़क से रास्ता नहीं है। 28 एकड़ जमीन ऐसी हैं, जिसका अधिग्रहण कर कई सामुदायिक सेवाओं का विस्तार हो सकता है। कोई भी कानूनी अड़चन नहीं है। प्रशासन की उदासीनता के कारण हम मुश्किलें झेल रहे हैं। - कुंदन लाल शर्मा, महासचिव सेक्टर 21 आरडब्ल्यूए