गुरुग्राम। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुधीर मित्तल ने पाथवेज स्कूल को आदेश दिए हैं कि वह निष्कासित सात छात्रों की पढ़ाई जारी रखे। इन सभी सात विद्यार्थियों की ओर से अदालत में याचिका दायर की गई थी। इस मामले में अदालत ने 10 सितंबर सुनवाई के लिए निर्धारित की है। साथ में यह भी कहा है कि अभिभावक एक सप्ताह के अंदर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार छह माह की फीस जमा करेंगे।
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति ने आदेश में कहा है कि अभिभावक और स्कूल प्रबंधन के बीच विवाद के चलते विद्यार्थियों को पढ़ाई से नहीं रोका जा सकता। इस मामले में बाल संरक्षण अधिकार आयोग, जिला उपायुक्त, खंड शिक्षा अधिकारी तथा जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी के समान आदेश हैं। इस आदेश को स्कूल प्रबंधन क्रियान्वित करे।
कई महीने पहले पांच विद्यार्थियों को स्कूल से निष्कासित करने का आदेश जारी किया था। दो विद्यार्थियों के बारे में स्कूल प्रबंधन ने नोटिस जारी किया है, जिसमें कहा है कि अक्तूबर माह से इन बच्चों को निष्कासित माना जाएगा। पूर्व में निष्कासित किए गए विद्यार्थियों के मामले को बाल संरक्षण अधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया था। इस मामले में आयोग की ओर से जिला उपायुक्त को निर्देश जारी किए गए थे। जिसमें कहा कि विद्यार्थियों की पढाई जारी रखी जाए। साथ में यह जांच की जाए कि इस प्रकरण में स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जेजे एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई बनती है या नहीं।
इस प्रकरण में जिला उपायुक्त डा. यश गर्ग ने भी आदेश किए थे कि बच्चों की पढ़ाई यथावत रखें। इस प्रकरण में जेजे एक्ट के तहत कार्रवाई का मामला न बनने के बारे में भी आयोग को अवगत कराया गया था। साथ में यह भी कहा था कि विवाद अभिभावक और स्कूल प्रबंधन के बीच का है। अत: इस मामले में विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए। इसी तरह के आदेश खंड शिक्षा अधिकारी और जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी ने दिए थे। याचिका में कहा है कि इन आदेश के बावजूद स्कूल प्रबंधन ने पढ़ाई से रोक दिया है।