गुरुग्राम। 16 जुलाई से स्कूलों को खोलने के आदेश जारी किए हैं। 9वीं से 12वीं कक्षा तक छात्र स्कूल में पढ़ाई करने आ सकेंगे। हालांकि इसके लिए बच्चों को अपने अभिभावकों से अनुमति लेकर आना होगा। वहीं सरकारी स्कूलों के साथ-साथ निजी स्कूलों को भी कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए बच्चों को पढ़ाई के लिए बुलाना होगा। लेकिन निजी स्कूलों में पढ़ाई के लिए आने वाले बच्चों के अभिभावकों में प्रबंधन की मनमानी को लेकर संशय बना हुआ है। क्योंकि काफी बच्चों की फीस जमा नहीं की जा सकी है। ऐसे में स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों को कक्षाओं में बैठने दिया जाएगा या नहीं, इस बात को लेकर अभिभावकों को चिंता है।
अभिभावकों का कहना है कि पिछले एक साल से अधिक समय से ऑनलाइन कक्षाएं लग रही है, ऐसे में अभिभावक ट्यूशन फीस देने का तैयार हैं। लेकिन स्कूल प्रबंधन ट्यूशन फीस के साथ ही बढ़ी हुई फीस, वार्षिक शुल्क भी जमा कराने का दबाव बनाए हुए हैं और कई निजी स्कूलों ने फीस नहीं जमा कराने वाले बच्चों के रिपोर्ट कार्ड तक नहीं दिए हैं।
फीस विवाद को लेकर जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों, गुरुग्राम मंडलायुक्त को शिकायतें की जा चुकी हैं। लेकिन अभिभावकों व निजी स्कूल प्रबंधन के बीच इस विवाद का समाधान नहीं निकल पाया है। ऐसे में जिन बच्चों की फीस स्कूलों में जमा नहीं कराई जा सकी है, उनके अभिभावकों को डर है कि स्कूल खुलने के बाद बच्चों को कक्षा में बैठने दिया जाएगा या नहीं। ऐसे में कई अभिभावक अपने बच्चों को फिलहाल स्कूलों में नहीं भेजना चाहते। वहीं कोरोना महामारी की तीसरी लहर का खौफ भी अभिभावकों में बना हुआ है।
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निजी स्कूल प्रबंधन अपनी मनमर्जी करते हुए फीस बढ़ाई है। लेकिन अभिभावकों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वह सिर्फ ट्यूशन फीस देना चाह रहे हैं। लेकिन स्कूल प्रबंधन पूरी फीस लेने पर अड़े हैं। इससे अभिभावकों एवं स्कूल प्रबंधन के बीच मामला खींचा हुआ है। स्कूल प्रबंधन को अभिभावकों की स्थिति समझनी चाहिए।
- सवमित्रा, अभिभावक।
निजी स्कूलों के प्रबंधन ने फीस वृद्धि करके अभिभावकों पर दबाव बनाया जा रहा है। लेकिन काफी अभिभावक इस स्थिति में नहीं है कि निजी स्कूलों द्वारा मांगी जा रही फीस को जमा करा सकें। अभिभावक ऑनलाइन कक्षाओं की ट्यूशन फीस देने का तैयार हैं। वे कोरोना संक्रमण के कारण अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे।
- कुलजीत, अभिभावक।
अभिभावकों को बच्चों की फीस स्कूलों में जमा करानी चाहिए, क्योंकि निजी स्कूलों के प्रबंधन को भी शिक्षकों व अन्य स्टाफ को वेतन देना होता है। कोर्ट के आदेशों के अनुसार निजी स्कूलों ने अभिभावकों को फीस जमा कराने के लिए समयावधि भी दी थी। लेकिन काफी अभिभावकों ने फीस जमा नहीं कराई।
- डॉ. यशपाल यादव, प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा शिक्षण संस्थान संगठन।
कोर्ट के आदेशों के अनुसार फीस जमा नहीं कराने की वजह से किसी भी छात्र की पढ़ाई को प्रभावित नहीं किया जा सकता। अगर कोई निजी स्कूल बच्चों को कक्षा में नहीं बैठाता है तो उसको जवाब तलब किया जाएगा। वहीं बच्चों को स्कूलों में भेजने का निर्णय अभिभावकों का है। स्कूलों में ऑफलाइन पढ़ाई के साथ ही ऑनलाइन पढ़ाई भी जारी रहेगी।
- सरोज दहिया, उप जिला शिक्षा अधिकारी, गुरुग्राम।