इंजीनियरिंग विंग से संयुक्त आयुक्त तक जवाबदेही तय, पार्षद से मेयर तक रखेंगे नजर
नंबर गेम - 04 दिन में 1027 शिकायतें मिलीं
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। शिकायत दर्ज होते ही समाधान का दावा करने वाले नगर निगम अधिकारियों की अब जवाबदेही तय करने की तैयारी है। जनशिकायतों को केवल एप पर निस्तारित दिखाकर जिम्मेदारी पूरी नहीं मानी जाएगी। शिकायत का वास्तविक समाधान हुआ या नहीं, इसकी निगरानी इंजीनियरिंग विंग से लेकर संयुक्त आयुक्त स्तर तक होगी। वहीं, पार्षदों से लेकर मेयर तक शिकायतों के निस्तारण पर नजर रखेंगे। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव आर के खुल्लर के आदेश के बाद यह व्यवस्था लागू की गई है।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद नगर निगम ने आमजन की समस्याओं के समाधान को लेकर निगरानी व्यवस्था सख्त करने की पहल की है। निगम के आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार दिन में 1027 शिकायतें मिलीं। इनमें से 701 का निस्तारण किया जा चुका है, जबकि 88 मामलों का जल्द समाधान करने का दावा किया गया है। ऐसे में शिकायतों के निस्तारण की गति के साथ उनकी गुणवत्ता भी अहम होगी।
जमीन पर दिखना होगा समाधान
नई व्यवस्था में शिकायत को एप पर बंद करना ही पर्याप्त नहीं होगा। संबंधित इंजीनियरिंग विंग को समस्या के समाधान की जिम्मेदारी निभानी होगी और उच्चाधिकारी भी निस्तारण की निगरानी करेंगे। मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सड़क, सीवर, जलभराव और सफाई जैसी समस्याओं के मामले में लोगों को केवल आश्वासन न मिले, बल्कि मौके पर राहत भी दिखाई दे।
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नगर निगम गुरुग्राम की ओर से एप पर आने वाली शिकायतों का समय से निपटारा किया जा रहा है। इसकी निगरानी के लिए तीन स्तर पर नजर रखी जा रही है। एप पर गलत तरीके से समाधान दिखाने वालों पर विभाग की नजर है। - प्रदीप दहिया, आयुक्त नगर निगम, गुरुग्राम