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इमरजेंसी के बाहर स्ट्रेचर पर बच्ची ने तोड़ा दम

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गुरुग्राम। सेक्टर-10 स्थित सिविल अस्पताल में पहले कोरोना संक्रमितों को उपचार नहीं मिल रहा था। अब सामान्य मरीजों के प्रति डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण मरीज जान गवां रहे हैं। बृहस्पतिवार को ऐसा ही मामला सामने आया। न्यू कॉलोनी की रहने वाली 10 साल की बच्ची राधिका ने उपचार और एंबुलेंस न मिलने पर इमरजेंसी में दम तोड़ दिया, जबकि परिजन डॉक्टरों से इलाज के लिए हाथ जोड़ते रहे, लेकिन किसी ने उसकी सुध नहीं ली।
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न्यू कॉलोनी की रहने वाली दुर्गा के मुताबिक सुबह उसकी बेटी राधिका छत से अचानक गिर पड़ी। वह गंभीर हालत में अपनी बच्ची को ऑटो में लेकर सिविल अस्पताल पहुंची। लेकिन स्टाफ ने बच्ची को उठाने की जहमत नहीं उठाई। इसके बाद वह खुद ही स्ट्रेचर में डालकर बच्ची को इमरजेंसी में लेकर गईं। काफी समय तक डॉक्टरों ने उसको नहीं देखा। इसके बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया। महिला का आरोप है कि वह इमरजेंसी के बाहर स्ट्रेचर पर बच्ची को लेकर खड़ी रही। वहां मौजूद स्टाफ से गुहार लगाई, लेकिन अस्पताल की ओर से एंबुलेंस नहीं मिली। इसके बाद अचानक बेटी की हालत बिगड़ने लगी। वह बच्ची को एक बार फिर अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर गई। जहां डॉक्टरों ने उसको मृत घोषित कर दिया। वहीं, बच्ची की मौत पर परिजनों ने हंगामा किया। जिस पर अस्पताल की कर्मचारी पर्दा डालते दिखाई दिए। जबकि इस मामले में अस्पताल के उच्चाधिकारी बोलने को तैयार नहीं था।
एंबुलेंस के लिए भटकती रही मां
अस्पताल के बाहर बने केंद्र पर बच्ची की मां एंबुलेंस के लिए स्टाफ से गुहार लगाती रही, लेकिन एंबुलेंस केंद्र पर तैनात महिला कर्मचारी ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उनको केवल कोविड मरीजों को ले जाने की अनुमति है। इस बारे में नागरिक अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. मनीष राठी से जानकारी करनी चाही, तो उनके मोबाइल पर बात नहीं हो सकी।
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