गुरुग्राम। मेरे बेटे के तबियत खराब हो रही है, उसे इलाज के लिए भर्ती कर लो, नहीं तो मर जाएगा। सेक्टर-10 स्थित सिविल अस्पताल में बेबसी के यह शब्द बृहस्पतिवार को सुनाई पड़े। जब अशोक विहार की रहने वाली चांद बीबी अपने अपने बेटे अनिल (35) को गंभीर हालत में लेकर इमरजेंसी पहुंची, लेकिन वहां न तो ऑक्सीजन मिली और न इलाज। डॉक्टरों ने टीबी की जांच के लिए दूसरे वार्ड में जाने की सलाह दे दी। आखिर में अनिल जिंदगी के जंग हार गए। वहीं, परिजन इमरजेंसी के बाहर व्हीलचेयर पर उनके शव के पास रोते-बिलखते रहे।
बृहस्पतिवार दोपहर अशोक विहार निवासी अनिल के परिजनों ने इमरजेंसी में डॉक्टरों से हाथ-जोड़कर उपचार के लिए विनती की और कई घंटे तक गेट पर खड़े रहे। बाद में डॉक्टरों ने टीबी की जांच कराने के लिए दूसरे वार्ड में जाने की सलाह दे डाली। लेकिन कुछ ही समय अनिल की हालत और बिगड़ गई। रोते- बिलखते परिजन एक बार फिर अनिल को लेकर डॉक्टरों के पास पहुंचे। जहां पर डॉक्टरों ने उसकी सांसें थमने की बात कह दी। इसके बाद परिजन शव को व्हीलचेयर पर रखकर इमरजेंसी के बाहर खड़े और रोते-रोते सरकारी सिस्टम को कोसते नजर आएं।
शव ले जाने को भटकते रहे परिजन
मौत के बाद भी तीमारदारों की मुश्किलें कम नहीं हुई। अनिल के शव को लेकर कई घंटे तक खड़े रहे और एंबुलेंस का इंतजार करते रहे, लेकिन एंबुलेंस नहीं मिली। बाद में प्राइवेट वाहन से शव को रखकर ले गए।
वर्जन-
यह प्रकरण जानकारी में नहीं है। मेरी ड्यूटी आज मोरचरी पर थी। इसलिए कोई जानकारी नहीं हो पाई। स्टाफ से जानकारी करने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। - डॉ. योगेंद्र कुमार, इंचार्ज इमरजेंसी