रिसर्च सेंटर भी बनेगा, मार्च तक निर्माण कार्य होगा पूरा
मनोज धर द्विवेदी
गुरुग्राम। सेक्टर-102ए स्थित श्री शीतला माता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का संचालन पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में किया जाएगा। योजना के अनुसार पीपीपी पर संचालित करने वाली संस्था नर्सिंग कॉलेज, पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट, इनोवेशन, रिसर्च सेंटर जैसी अतिरिक्त सेवाएं स्थापित करेंगी। पीपीपी ड्रॉफ्ट को चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय पंचकूला की ओर से फाइनल किया जा रहा है।
गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) की ओर से सेक्टर-102ए में श्री शीतला माता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण कार्य एक अप्रैल 2022 को शुरू किया गया था और जुलाई 2024 पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि इसे मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। मुख्य अस्पताल ब्लॉक (883 बिस्तर) और शैक्षणिक ब्लॉक में भी सभी निर्माण कार्य पूरे हो चुके हैं। स्नातक और इंटर्न छात्रों के छात्रावास (228 सीटें) का भी कार्य पूरा हो चुका है। ईएसएस ब्लॉक, ऑटोप्सी बिल्डिंग, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और गैस मैनिफोल्ड बिल्डिंग, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और प्लंबिंग कार्यों को पूरा किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने हाल में जीएमडीए बोर्ड बैठक में मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल को पीपीपी आधार पर संचालित करने के लिए कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया था। इसके बाद मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड पर श्री शीतला माता मेडिकल कॉलेज और टीचिंग हॉस्पिटल के ऑपरेशन और मेंटेनेंस पर विस्तार से चर्चा की थी। योजना के अनुसार 150 एमबीबीएस स्टूडेंट होंगे और अस्पताल की क्षमता 850 बेड होगी। पीपीपी में 66 फीसदी बेड सस्ते रेट पर और 34 फीसदी बेड प्रीमियम रेट पर रिजर्व करने की योजना है। हालांकि, इसे फाइनल करने से पहले इस नियम पर विचार किया जा रहा है। सरकार इससे संबंधित औपचारिकताओं को पूरा करने में लगी हुई है।
जिले का पहला सरकारी कॉलेज होगा
गुरुग्राम में काफी संख्या में इंडस्ट्री और निजी कंपनियों के कार्यालय है। जिले में सरकारी स्वास्थ्य सेवा काफी लचर है। प्रदेश सरकार जिला नागरिक अस्पताल का अभी निर्माण कार्य शुरू नहीं करा सकी है। ऐसे में सरकार को पूरा जोर श्री शीतला माता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल शुरू कराने की है। अभी सेक्टर-10 में नागरिक अस्पताल है। ऐसे में गंभीर मरीजों को पीजीआई रोहतक और सफदरजंग दिल्ली रेफर करना पड़ता है। शहर में मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल खुलने से गंभीर मरीजों का स्थानीय स्तर पर उपचार हो सकेगा।