-हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने पत्र जारी कर दिए निर्देश, अफसरों को आवेदन पर अधिकतम पांच कार्य दिवसों में निर्णय लेना होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम के तहत पंजीकृत सभी केंद्रों को पत्र जारी कर निर्देश दिए हैं कि वे किसी गर्भवती महिला की एक या अधिक बेटियां हैं तो उसकी एम्नियोसेंटेसिस या कोरियोनिक विलस एस्पिरेशन/सैंपलिंग (सीवीएस) से पहले संबंधित जिला उपयुक्त प्राधिकरण (डीएए) से लिखित अनुमति लेनी होगी।
सभी जिला अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे आवेदन पर अधिकतम पांच कार्य दिवसों के भीतर निर्णय लें, ताकि अनावश्यक देरी न हो। इसके साथ ही सभी जिलों के सिविल सर्जनों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि उनके अधीन कार्यरत सभी पंजीकृत केंद्र दिए गए निर्देशों का सख्ती से पालन करें। यह आदेश राज्य में भ्रूण लिंग चयन की रोकथाम और बालिका संरक्षण की दिशा में एक अहम प्रशासनिक कदम माना जा रहा है।
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क्या होता है एम्नियोसेंटेसिस-
एम्नियोसेंटेसिस गर्भावस्था के दौरान होने वाला चिकित्सा परीक्षण है, जिसमें एमनियोटिक द्रव का एक छोटा सा नमूना लिया जाता है। इस द्रव में भ्रूण की कोशिकाएं होती हैं, जिनका विश्लेषण करके आनुवंशिक स्थितियों और जन्म दोषों का पता लगाया जा सकता है।
कोरियोनिक विलस एस्पिरेशन/सैंपलिंग
कोरियोनिक विलस सैंपलिंग एक प्रसवपूर्व जांच होती है जिससे गर्भावस्था के दौरान आनुवंशिक और असामान्यताओं क्रोमोसोम का पता लगाने के लिए किया जाता है। यह परीक्षण 10वें से 13वें सप्ताह के बीच किया जाता है।