समय पर भुगतान ना होने पर बहाना बना कर मरीजों को लौटा रहे अस्पताल
संवाद न्यूज एजेंसीनगीना। जिले में आयुष्मान-चिरायु कार्ड योजना के तहत पांच निजी अस्पतालों में मरीजों का इलाज किया जा रहा है, लेकिन बहुत सारे लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण है सराकर की ओर से निजी अस्पतालों को समय पर भुगतान न होना। निजी अस्पताल संचालकों का कहना है कि हरियाणा सरकार ने इस योजना के तहत इलाज किए जा रहे मरीजों के एक करोड़ रुपये से ज्यादा बिल का भुगतान नहीं किया है। हालांकि, सरकार और अस्पतालों के इस विवाद में नुकसान आम लोगों का हो रहा है।
जिले में कुल 29 अस्पतालों में इस योजना के तहत मरीजों का इलाज किया जा रहा हैं। इनमें 5 निजी अस्पताल भी शामिल हैं। जिले में 5.16 लाख से ज्यादा लोग इस योजना के तहत पंजीकृत हैं, लेकिन इन लोगों को इलाज करवाने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इलाज के पैसों का भुगतान ना होने के कारण अस्पताल इलाज करने में बहाने बना रहे हैं। निजी अस्पताल संचालकों का कहना हैं कि मरीजों के इलाज के बाद भी कई-कई महीनों तक भुगतान नहीं होता है। इससे अस्पताल को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
मरीजों का इलाज करने के बाद नहीं होता भुगतान
वहीं, एक निजी अस्पताल संचालक ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि उन्होंने आयुष्मान-चिरायु कार्ड से करीब 4 महीने पहले इलाज करना शुरू किया हैं। तब से लेकर अब तक उन्होंने करीब 65 मरीजों का इलाज किया, लेकिन उनको एक बार भी भुगतान नहीं हुआ है। सरकार के नियम के मुताबिक अगर बीच में ही मरीजों का इलाज करना बंद कर दिया तो आयुष्मान कार्ड वाली पॉलिसी को बंद कर दिया जाएगा, इस डर से निजी अस्पताल संचालक इलाज करने से मना भी नहीं कर सकते।
अस्पताल संचालकों ने की 15 दिन में भुगतान की मांग
तावडू स्थित अल-स्लम अस्पताल के संचालक डॉ राशिद का कहना है कि मरीज के इलाज के लिए 15 दिन में भुगतान कर दें तो किसी भी तरह की समस्या नहीं आएगी। उन्होंने कहा 700 से ज्यादा मरीजों का इलाज योजना से किया गया हैं। इनमें 400 से ज्यादा मरीजों के इलाज का 60 लाख से ज्यादा का पेमेंट बकाया हैं।
264 मरीज उठा चुके हैं योजना का लाभ, 22 लाख है बकाया तावडू स्थित देवांश अस्पताल के संचालक डॉ. राहुल ने कहा कि 264 मरीजों का इलाज आयुष्मान चिरायु कार्ड के जरिए किया गया हैं। अभी करीब 22 लाख रूपये का अमाउंट बाकी हैं। योजना के जरिये पित्त की थैली, अपेण्डीक्स, हृनिया और बच्चें दानी निकालने का ऑपरेशन किया जाता हैं।
करीब डेढ़ साल पहले लकवा की बीमारी से ग्रस्त हो गई थी। इसका इलाज कराने के लिए आयुष्मान-चिरायु कार्ड के जरिये निजी अस्पतालों के चक्कर काटे, लेकिन यह कहकर मना कर दिया की सरकार द्वारा आयुष्मान कार्ड से किए जा रहे मरीजों के बिलों का भुगतान नहीं हो रहा हैं। इसके बाद अपने पास से पैसे खर्च कर अलवर के निजी अस्पताल में इलाज कराया है। -रुकसीना, बड़वा
पापा को पित्त की थैली में पथरी हो गई थी। इसका इलाज कराने के लिए आयुष्मान कार्ड से इलाज करने वाले नूंह के एक अस्पताल में लेकर गए, लेकिन उन्होंने यह कहकर मना कर दिया की पेमेंटनहीं आ रही हैं। -युसूफ, निवासी बड़वा।
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आयुष्मान-चिरायु कार्ड से इलाज करने वाले कुछ निजी अस्पतालों की पेमेंट रुकने का मामला सरकार के संज्ञान में है, जिसका समाधान किया जा रहा हैं। अभी हाल ही में करोड़ों रुपये का भुगतान सरकार ने किया है। आयुष्मान चिरायु कार्ड से इलाज अभी भी जारी हैं। कोई भी निजी अस्पताल संचालक मरीजों के इलाज में आना-कानी नहीं करेगा। -सर्वजीत थापर, सिविल सर्जन नूंह।