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चारों मंडियों के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त, समस्या होने पर करें संपर्क : डीसी

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जिले में अब तक हैफेड ने 2,971 और वेयरहाउस ने 25 क्विंटल सरसों खरीदी
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संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। तावडू, नूंह, फिरोजपुर झिरका व पुन्हाना मंडी में सरसों की खरीद की जा रही है। इसमें से नूंह, तावडू व पुन्हाना मंडी के लिए हरियाणा स्टेट वेयरहाउस खरीद एजेंसी अलॉट है, वहीं फिरोजपुर झिरका मंडी में हैफेड फसल की खरीद कर रही है। जिला उपायुक्त ने यह जानकारी देते हुए कहा कि किसान मंडियों में सरसों लाए खरीद चालू है, किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो तुरंत शिकायत दें। शिकायत के समाधान के लिए चारों मंडियों में नोडल अधिकारी नियुक्त कर दिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि फिरोजपुर झिरका मंडी में हैफेड द्वारा लगभग 2,971 क्विंटल सरसों की खरीद की जा चुकी है। वहीं, तावडू मंडी में 25 क्विंटल सरसों की खरीद हरियाणा स्टेट वेयरहाउस की ओर से की जा चुकी है। इसके साथ ही प्रयाप्त बारदाना भी मंडियों में पहुंच चुका है। उपायुक्त ने बताया कि सरकार की हिदायतों के अनुसार सरसों की खरीद की जा रही है। किसानों की सरसों खरीद करने के लिए संपूर्ण व्यवस्थाएं कर ली गई है ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके अतिरिक्त किसी भी किसान को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। यदि किसी किसान को खरीद से संबंधित किसी भी प्रकार की परेशानी होती है तो वो नूंह अनाज मंडी के लिए नियुक्त अधिकारी जमील (8053818553) तावड़ू अनाज मंडी के लिए नियुक्त अधिकारी हसनदीप (9813508683), पुन्हाना अनाज मंडी के लिए राजेन्द्र सिंह नरुका (8950766319) और फिरोजपुर झिरका में भूपेंद्र (9991252600) से संपर्क कर सकते हैं।
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गीली सरसों न लाएं

मंडी में खरीद एजेंसी को दिक्कत आ रही है कि सरसों में नमी है और एक निर्धारित मापदंड के अनुसार ही सरकारी खरीद की जा सकती है। सरसों की नमी 8 प्रतिशत होनी चाहिए, लेकिन अभी मंडी में जो सरसों आ रही है उसकी नमी 12 से 13 प्रतिशत तक है। ऐसे में डीएम ने किसानों को सलाह दी है कि वह फसल को सुखाकर और साफ सुथरा करके लेकर आए।
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कुछ किसान सरकार को नहीं बेचना चाहते फसल

कुछ किसान एमएसपी से 200 से 300 रुपये कम रेट पर अपनी सरसों बेचकर राजी है, क्योंकि वह नहीं चाहते कि सरकार के एमएसपी के चक्कर में पड़े।एमएसपी के जरिये पैसा उनके बैंक खातों में जाएगा। अधिकांश किसान बैंकों में डिफॉल्टर है और उन्हें कहीं ना कहीं इस पैसे के कटने का भी डर है। इसलिए किसान चाहता है कि वह भले ही मामूली अंतर से फसल निजी बेच दी।
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