मानेसर/फर्रुखनगर। फर्जी शिक्षा प्रमाण पत्र के दम पर आईएमटी मानेसर क्षेत्र के गांव बांसहरिया की सरपंच सविता उर्फ सीमा को न्यायालय से भी राहत नहीं मिली है। गुरुग्राम जिला उपायुक्त अमित खत्री ने हरियाणा पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा-51 के तहत उक्त सरपंच को निलंबित कर दिया है। पंचायत का कार्य सुचारु रुप से चलाने के लिए खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी फर्रुखनगर को 21 जून 2019 पत्र क्रमांक-528 के तहत लिखित आदेश दिये थे कि कार्यवाहक सरपंच बनाने के लिए बहुमत वाले पंच को तुरंत प्रभाव से चार्ज सौंप दिया जाए। इसके बावजूद भी अभी तक ग्राम पंचायत का चार्ज किसी भी पंच को नहीं सौंपा गया है, जिससे ग्रामीणों में रोष है।
ग्रामीणों का आरोप है कि अगर जल्द ही कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई, तो वह इसके विरोध में धरना प्रदर्शन करेंगे। सरपंच की शिक्षण योग्यता को गलत ठहराने वाले ग्रामीण जयप्रकाश कौशिक, सुरेंद्र नंबरदार, पूर्व सरपंच विनोद शर्मा, कुलदीप, सुमन पंच, सोनू पंच, अरुण पंच, ब्रह्म प्रकाश व जय शर्मा का कहना है कि उनके गांव की सरपंच ने 17 जनवरी 2016 को हुए सरपंच पद के चुनाव के दौरान अपने नामांकन पत्र के साथ शिक्षण योग्यता के नाम पर कक्षा आठवीं का प्रमाण पत्र लगाया था। ग्रामीणों ने सरपंच की शिक्षण योग्यता की जांच के लिए प्रधान सचिव पंचायत एवं विकास विभाग चंडीगढ़ को लिखित शिकायत दी थी। जांच के दौरान सरपंच की शिक्षण योग्यता प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया। इसके बाद जिला उपायुक्त गुरुग्राम अमित खत्री ने सरपंच को निलंबित कर दिया।
वहीं खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी फर्रुखनगर के कार्यालय से पत्र क्रमांक 1463 दिनांक 30 अगस्त 2019 के तहत ग्राम सचिव कुलदीप को आदेश दिए थे कि जिला उपायुक्त के आदेशानुसार ग्राम पंचायत बांसहरिया की सरपंच सविता उर्फ सीमा को निलंबित कर दिया। अतरू ग्राम पंचायत की समस्त चल अंचल संपत्ति का रिकार्ड अपने अधिकार में ले लें। उसके उपरांत एजेंडा जारी कर पंचों की बैठक बुलाकर बहुमत वाले पंच को कार्यवाहक सरपंच का चार्ज सौंप दिया जाए।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिला उपायुक्त व बीडीपीओ के आदेश पर भी संबंधित अधिकारी व कर्मचारी निलंबित सरपंच से न तो चार्ज ले रहे और न ही किसी बहुमत वाले पंच को कार्यवाहक सरपंच नियुक्ति के लिए कोई एजेंडा जारी किया है। जिस कारण गांव में विकास कार्य व सफाई व्यवस्था ठप पड़ी है। गांव में जगह-जगह गंदगी के अंबार लगे है। इतना ही नहीं गांव के युवाओं, छात्र-छात्राओं के चरित्र प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र के अलाव पंचायत से संबंधित कार्यों के लिए भटकना पड़ रहा है।