उपायुक्त ने एक महीने पहले आदेश किए थे जारी, फिर भी शुरू नहीं हुई प्रणाली
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। ड्यूटी के प्रति लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों पर जिला प्रशासन ने शिकंजा कसने के लिए सभी दफ्तरों में बायोमैट्रिक हाजिरी लगाने के आदेश जारी किए थे। लेकिन, एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह प्रणाली शुरू नहीं हो पाई है। लिहाजा ड्यूटी के प्रति अधिकारियों-कर्मचारियों की लापरवाही जारी है। इससे आमजन परेशान है। उपायुक्त भले ही इस मामले में गंभीर है, लेकिन उनके नीचे काम कर रहे अधिकारी उनके आदेशों को लेकर फिक्रमंद नहीं है।
अधिकांश अधिकारी अपना जिला मुख्यालय भी मेंटेन नहीं कर रहे हैं। अधिकारियों पर सुबह देर से आने और शाम को जल्दी जाने का आरोप है, जबकि उनका जिला मुख्यालय पर रहना अनिवार्य है। इतना ही नहीं कुछ अधिकारी इसके लिए सरकारी गाड़ी का दुरुपयोग भी उपयोग कर रहे हैं। लोगों का सवाल है कि डीसी ऐसे बेलगाम अधिकारियों और कर्मचारियों पर कब लगाम लगाएंगे। उपायुक्त ने पिछले कई साल से बंद पड़ी बायोमेट्रिक हाजिरी मशीनों को शुरू करने के लिए एक जनवरी को आदेश जारी किए थे।
उपायुक्त ने अतिरिक्त उपायुक्त को आदेश दिए थे कि अगले 10 दिन में यह व्यवस्था शुरू हो जानी चाहिए। सबसे पहले उपायुक्त कार्यालय में ही यह मशीन लगाई जाएगी। इसके बाद सभी दफ्तरों में इन्हें चालू किया जाएगा। हालांकि, उनके इन आदेशों का पालन अभी तक नहीं हुआ है। दरअसल, मेवात में देखा जा रहा है कि कुछ अधिकारी व कर्मचारी सुबह अपने कार्यालय समय पर नहीं पहुंचते हैं तथा छुट्टी होने से पहले घर को चले जाते हैं। इसके अलावा कुछ कर्मचारी व अधिकारी बंक भी मारते हैं। लगातार सामने आ रही इस समस्या को अमर उजाला ने भी 25 दिसंबर को प्राथमिकता से अपने अंक में प्रकाशित किया। जिस पर उपायुक्त ने संज्ञान लेते हुए यह प्रणाली लागू करने के लिए आदेश जारी कर दिए हैं। इसके बाद लापरवाह अधिकारियों व कर्मचारी की मनमर्जी पर काफी हद तक लगाम लगने की उम्मीद थी, लेकिन अभी यह व्यवस्था शुरू नहीं कि गई है।
कोविड में बंद की गई थी व्यवस्था
कोविड के दौरान बायोमैट्रिक हाजिरी प्रणाली को बंद कर दिया गया था। लेकिन, धीरे-धीरे कुछेक अधिकारी व कर्मचारी सुबह ड्यूटी पर देर से आने के आदि होते चले गए। लगातार लेट आना और जल्दी जाना इस कार्य शैली से आमजन भी परेशान है। इससे सुशासन देने की बात करने वाली सरकार की छवि भी धुमिल हो रही है। इन तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उपायुक्त विश्राम मीणा ने यह निर्णय लिया था, लेकिन अभी तक यह सिरे नहीं चढ़ा। काफी अधिकारी अपना जिला मुख्यालय भी मेंटेन नहीं करते जो नियमानुसार गलत है।