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दिव्यांगों को सशक्त बनाने की जरूरत : उपराष्ट्रपति

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उपराष्ट्रपति ने गुरुग्राम में दिव्यांगता पर 10वें राष्ट्रीय सम्मेलन को किया संबोधित
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि दिव्यांग लोगों को सहानुभूति की वस्तु नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि उनके ज्ञान, योग्यता और विशेषज्ञता के लिए मान्यता का पात्र होना चाहिए। उन्होंने एक ऐसा इको-सिस्टम बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया जिसके माध्यम से अपार प्रतिभा के धनी दिव्यांगों को सशक्त बनाया जा सकें।
उपराष्ट्रपति शनिवार को गुरुग्राम के सेक्टर 45 स्थित सार्थक फाउंडेशन के ग्लोबल रिसोर्स सेंटर में दिव्यांगता विषय पर 10वें राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इससे पहले हरियाणा के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ओम प्रकाश यादव ने उपराष्ट्रपति का गुरुग्राम आगमन पर स्वागत किया।
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अपने संबोधन में उन्होंने डिस्लेक्सिया से पीड़ित वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के उदाहरण का भी उल्लेख किया। उन्होंने सभी प्रकार की दिव्यांगता के लिए उपयुक्त समाधान तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने दिव्यांगों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों सहित कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल देते हुए कॉर्पोरेट संस्थाओं से अपने कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) फंड को समाज के इन वर्गों को सशक्त बनाने के लिए खर्च करने का आह्वान किया। उन्होंने वर्ष 2016 में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम के अधिनियम की सराहना करते हुए इसके संपूर्ण प्रावधानों पर संतोष व्यक्त किया।
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इस अवसर पर भारत सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सचिव राजेश अग्रवाल, गुरुग्राम के डिविजनल कमिश्नर आरसी बिढान, डीसी निशांत कुमार यादव, सीपी विकास अरोड़ा, एसडीएम बादशाहपुर सतीश यादव आदि मौजूद रहे।
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