गुरुग्राम। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के लिए इस बार चयन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब प्रतिभाशाली बच्चों को अपनी उपलब्धियों का प्रचार करने या खुद आवेदन करने पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इसके बजाय सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों की जिम्मेदारी तय की गई है कि वे अपने यहां पढ़ने वाले बच्चों की पहचान कर उनका नामांकन कराएं।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की नई गाइडलाइन के अनुसार, स्कूल प्रमुख और शिक्षक ऐसे विद्यार्थियों की सूची तैयार करेंगे जिन्होंने वीरता, समाज सेवा, कला एवं संस्कृति, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण संरक्षण और खेल के क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल की हैं। इसके बाद स्कूल पोर्टल के माध्यम से उनका पंजीकरण कराएंगे। नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जानकारी के अभाव में कोई भी योग्य बच्चा पुरस्कार से वंचित न रहे। गाइडलाइन में दिव्यांग बच्चों, बेटियों, अनुसूचित जाति-जनजाति और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रतिभाशाली बच्चों को भी प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया है। राष्ट्रीय बाल पुरस्कार के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है। विभाग ने सभी स्कूलों से समय रहते बच्चों की पहचान कर उनका नामांकन कराने के निर्देश दिए हैं। संवाद