अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। हरियाणा में पालिका और फायर कर्मचारियों की हड़ताल 33वें दिन भी जारी रही। हरियाणा सरकार ने बड़ी संख्या में कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस, निलंबन और सेवा समाप्ति के आदेश जारी किए हैं। नगरपालिका कर्मचारी संघ ने इन कार्रवाइयों का विरोध करते हुए मंगलवार को प्रदर्शन का एलान किया है। हड़ताली कर्मी उल्टी झाड़ू और काले झंडे लेकर प्रदर्शन करेंगे।
संघ की मुख्य मांगें कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना और ठेकेदारी प्रथा समाप्त करना है। संघ नेताओं ने कहा कि सरकार की धमकियों से कर्मचारी नहीं डरेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हड़ताल का समाधान करने के बजाय पुलिस बल का प्रयोग कर रही है। कर्मचारी नेताओं ने दावा किया कि शहरों में कूड़ा उठाने और सफाई के सरकारी प्रयास विफल रहे हैं। संघ ने हड़ताल के दौरान कूड़ा उठान और सफाई व्यवस्था पर किए गए सभी खर्चों की निष्पक्ष जांच की मांग की। राज्य उप प्रधान बसन्त कुमार ने हरियाणा सरकार पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया। इस मौके पर वरिष्ठ उप प्रधान सम्मी बोहत, जिला प्रधान साहुन खान, सचिव धर्मेंद्र जिंघाला और कोषाध्यक्ष भारत कांगड़ा आदि मौजूद रहे।
ठेका प्रथा खत्म करने की मांग
संघ ने शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मंत्री हड़ताल का समाधान नहीं निकाल रहे हैं, जबकि जनता परेशान है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण बेदी की भी आलोचना की गई। संघ ने 13 मई के समझौते को लागू करने और सफाई एवं सीवर कार्य से ठेका प्रथा समाप्त करने की मांग की। फायर कर्मचारी रणबीर और भवी चंद शर्मा के आश्रितों को 50-50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और पक्की नौकरी देने की भी मांग की गई।
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