झारखंड से नौकरी दिलवाने का झांसा देकर लाया गया, बिना वेतन के करवाया जा रहा था घरेलू काम
हर छह महीने में बदल दी जाती थी लोकेशन, टीम गठित कर शुक्रवार को सेक्टर-40 से छुड़वाया
संवाद न्यूज एजेंसी
बादशाहपुर। झारखंड की एक 23 वर्षीय युवती को कथित तौर पर पिछले पांच वर्षों से बंधक बनाकर घरेलू काम करवाने और वेतन न देने का मामला सामने आया है। मां की शिकायत पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की मदद से गुरुग्राम पुलिस, प्रशासन और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए शुक्रवार को युवती को सेक्टर-40 स्थित एक मकान से सुरक्षित रिहा करवाया।
पीड़िता की पहचान झारखंड के साहेबगंज जिले की निवासी के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि युवती पिछले करीब पांच वर्षों से लापता थी। परिजनों के अनुसार गांव की ही एक महिला एजेंट ने उसे दिल्ली में अच्छी कंपनी में नौकरी दिलवाने का झांसा दिया था। इसके बाद उसे झारखंड से दिल्ली लाया गया जहां शुभांशु और सुनीता से वो मिली। इसके बाद उसे नौकरी दिलवाने के बजाय घरों और कोठियों में घरेलू काम पर लगाया जाता रहा।
किसी तरह से युवती ने भाई से किया संपर्क तब हुआ स्थिति का खुलासा
परिवार का आरोप है कि युवती से साफ-सफाई और घरेलू काम लगातार करवाए जाते रहे लेकिन उसे कभी वेतन नहीं दिया गया। जब भी वह घर लौटने की बात करती उसकी लोकेशन बदल दी जाती थी। करीब हर छह महीने में उसे दूसरी जगह भेज दिया जाता था ताकि वह किसी से संपर्क न कर सके। लगभग दो साल पहले उसे गुरुग्राम लाया गया था। मामले का खुलासा तब हुआ जब युवती ने किसी तरह अपने भाई से फोन के जरिये संपर्क किया। इसके बाद उसकी मां मुंगली मुर्मू ने दिल्ली स्थित झारखंड भवन पहुंचकर बेटी को मुक्त कराने की गुहार लगाई। झारखंड भवन के नोडल अधिकारी राहुल सिंह ने मामले को गंभीर मानते हुए मिशन मुक्ति फाउंडेशन को पत्र भेजा। संस्था की ओर से एनएचआरसी में शिकायत दर्ज कराई गई।
संयुक्त टीम ने सेक्टर-40 में छापा मारकर छुड़वाया
शिकायत मिलने के बाद एनएचआरसी की सदस्य प्रियंक कानूनगो ने तुरंत संज्ञान लिया और गुरुग्राम के पुलिस उपायुक्त ईस्ट, जिला प्रशासन, श्रम विभाग और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने के निर्देश दिए। इसके बाद गठित टीम ने सेक्टर-40 के मकान नंबर 787 में छापा मारा। मौके पर केवल युवती और सुरक्षा कर्मी मौजूद थे। टीम ने युवती को सुरक्षित बाहर निकालकर परिजनों को सौंप दिया।
एनएचआरसी ने वेतन दिलवाने और पूरे नेटवर्क की जांच करवाने के दिए निर्देश
एनएचआरसी ने मामले को मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी से जुड़ा गंभीर अपराध मानते हुए पीड़िता को बकाया वेतन दिलवाने और पूरे नेटवर्क की जांच करने के निर्देश भी दिए हैं। युवती को परिजनों से मिलवाने के लिए गठित टीम में मिशन मुक्ति फांउडेशन के निदेशक विरेंद्र, महिला एवं बाल विकास विभाग, झारखंड सरकार और झारखंड भवन, नई दिल्ली से राहुल, नायब तहसीलदार, श्रम निरीक्षक नरेश कुमार गठित टीम में शामिल रहे।
युवती को सेक्टर 40 से सुरक्षित बचाकर उसके परिजनों से मुलाकात करवा दी गई है। मामले से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए युवती और परिजनों से सेक्टर-40 थाने में पूछताछ चल रही है। - विरेंद्र, मिशन मुक्ति फांउडेशन, निदेशक