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Gurugram News: सरकारी नौकरी के लिए दिए थे रुपये, शिकायतकर्ता पर ही केस

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प्रवीन कुमार
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गुरुग्राम। नारनौल कोर्ट में दामाद की नौकरी लगवाने के नाम पर एक किसान से 20 लाख रुपये की धोखाधड़ी के मामले में नया मोड़ आया है। पुलिस ने शिकायतकर्ता किसान के खिलाफ ही केस दर्ज कर लिया है, जबकि उसकी शिकायत पर संबंधित केस अलग चल रहा है।
पुलिस का कहना है कि किसान ने शिकायत में सरकारी नौकरी लगवाने के लिए 20 लाख रुपये देने की बात स्वीकार की है, जोकि अपराध की श्रेणी में आता है।
19 अप्रैल को सेक्टर 17/18 थाने में किसान खेमचंद की शिकायत पर धोखाधड़ी का एक मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता खेमचंद ने बताया था कि वह रेवाड़ी के खलियावास गांव का रहने वाला है और खेतीबाड़ी करता है। उसके दोस्त वीरेंद्र सिंह ने उसे बहादुर सिंह ठाकुर नाम के एक व्यक्ति से मिलवाया था।
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बहादुर सिंह ने खुद को पूर्व मुख्य न्यायाधीश का रिश्तेदार बताया था। खेमचंद का दामाद धर्मवीर गुरुग्राम में एक ठेकेदार के पास सुपरवाइजर की नौकरी करता है। बहादुर सिंह ने धर्मवीर को नारनौल कोर्ट में चतुर्थ श्रेणी की नौकरी दिलवाने की बात कही थी। इसके बाद खेमचंद ने अपने दामाद को नौकरी लगवाने के लिए 12 फरवरी 2016 को गुरुग्राम के सेक्टर-18 में 10 लाख रुपये बहादुर सिंह को नकद दिए थे। इसके बाद एक मार्च 2016 को उसने पूर्व जज की पत्नी के लिए राजस्थान स्थित नीमराना में फार्म हाउस दिलवाने और दूसरे बच्चे की नौकरी का लालच देकर 10 लाख रुपये और ऐंठ लिए।
इस मामले से अलग अब पुलिस ने किसान खेमचंद के खिलाफ भी सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हुए रुपये देने के आरोप में केस दर्ज किया है। जांच अधिकारी सतीश कुमार से इस संदर्भ में जांच चल रही है, लिहाजा अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।
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पैसे मांगने पर देने लगा धमकी : बहादुर सिंह ने खेमचंद से कुल 20 लाख रुपये नकद ले लिए लेकिन जब नारनौल कोर्ट में चतुर्थ श्रेणी की भर्ती संबंधी सूची जारी हुई तो उसमें खेमचंद के दामाद धर्मबीर का नाम नहीं था। खेमचंद ने जब बहादुर सिंह से इस बारे में बात की तो उसने कहा कि अगली भर्ती में दो बच्चों को नौकरी पर लगवा देगा। इसके बाद भी बहादुर सिंह ने उसके दामाद व बेटे को नौकरी नहीं लगवाई। जब खेमचंद ने अपने 20 लाख रुपये वापस मांगे तो बहादुर सिंह टालमटोल करता रहा और बाद में धमकियां देने लगा।
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