वेबसाइट पर रिपोर्ट फ्लड डेप्थ नाम से विशेष फीचर जोड़ा
जलभराव के 55 हाॅटस्पाट का हुआ समाधान, 200 हाॅटस्पाट नए ओर मिले
सौम्या गुप्ता
गुरुग्राम। मिलेनियम सिटी को हर मानसून में जलभराव की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है। इस परेशानी से निपटने और शहर के संवेदनशील इलाकों की सटीक पहचान करने के लिए नगर निगम गुरुग्राम (एमसीजी) ने नई डिजिटल पहल शुरू की है। एमसीजी ने अपनी वेबसाइट पर रिपोर्ट फ्लड डेप्थ नाम से एक विशेष फीचर जोड़ा है, जिसके जरिए आम लोग यह जानकारी सीधे निगम तक पहुंचा सकेंगे कि उनका वाहन कितना पानी में है। इस विकल्प के जरिये दर्ज की गई शिकायतों का समाधान किया जाएगा और संबंधित इलाके की ड्रेनेज व्यवस्था को बेहतर करने के लिए काम किया जाएगा।
इस सुविधा के तहत लोगों को अपने मोबाइल नंबर के साथ जलभराव वाली जगह की फोटो या वीडियो अपलोड करनी होगी। सिस्टम में रेफरेंस पॉइंट्स भी दिए गए हैं, जैसे वाहन के टायर, दरवाजे या बोनट तक पानी भरना। निगम का उद्देश्य है कि वास्तविक और प्रमाणित जानकारी के आधार पर जलभराव वाले क्षेत्रों का डेटा तैयार किया जाए।
फर्जी शिकायतों और गलत जानकारी से बचने के लिए फोटो या वीडियो अपलोड करना अनिवार्य रखा गया है। पोर्टल पर हाल ही में हुई बारिश के दौरान जलभराव के सबूत साझा कर सकते हैं, वहीं बारिश के समय रियल टाइम रिपोर्टिंग की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। एमसीजी का मानना है कि लगातार डेटा जुटने से भविष्य में जलनिकासी व्यवस्था को और बेहतर बनाया जा सकेगा।
जलभराव और सीवर ओवरफ्लो रोकने को लगेंगे 40 स्मार्ट सेंसर
मानसून के दौरान जलभराव और सीवर ओवरफ्लो की समस्या से निपटने के लिए एमसीजी शहर में 40 नए सेंसर लगाने जा रहा है। इनमें 20 फ्लड डेप्थ सेंसर और 20 सीवर ओवरफ्लो डिटेक्शन सेंसर शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, अभी तक केवल यह पता चलता था कि किस इलाके में पानी भरता है, लेकिन पानी की वास्तविक गहराई की सटीक जानकारी नहीं मिल पाती थी। नए फ्लड डेप्थ सेंसर पानी की गहराई मापेंगे, जिससे सटीक मॉडलिंग और बेहतर प्लानिंग संभव हो सकेगी। ये सभी सेंसर सोलर पावर्ड होंगे। वहीं, सीवर ओवरफ्लो सेंसर शहर के उन हॉटस्पॉट्स पर लगाए जाएंगे जहां मानसून में सीवर जाम और ओवरफ्लो की समस्या रहती है। निगम का दावा है कि 10 जून तक सभी सेंसर इंस्टॉल कर दिए जाएंगे।
जलभराव के 353 हॉटस्पॉट किए गए मैप
नगर निगम मानसून के दौरान जलभराव की समस्या को कम करने के लिए सुधार के लिए आईआईटी गांधीनगर के साथ काम कर रहा है। आईआईटी गांधीनगर की ओर से शहर में करीब 200 नए हॉटस्पॉट्स की पहचान कर मैपिंग की गई है, जिन्हें पुराने डेटा में शामिल करते हुए कुल संख्या लगभग 353 तक पहुंच गई है। इन सभी स्थानों पर जलभराव की स्थिति की निगरानी और समाधान के लिए विशेष योजना तैयार की गई है। एमसीजी अधिकारियों के अनुसार, अब तक करीब 55 हॉटस्पॉट्स का समाधान किया जा चुका है। कई स्थानों पर ड्रेनेज कनेक्शन नहीं थे, जिन्हें मुख्य सिस्टम से जोड़ा गया है। वहीं जहां ड्रेनेज की सुविधा ही नहीं थी, वहां नई ड्रेनेज लाइनें बिछाई जा रही हैं।इसके अलावा कुछ संवेदनशील स्थानों पर बड़े सम्प और रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर तैयार किए गए हैं। पालम विहार जैसे इलाकों में ड्रेनेज पानी को पहले सम्प में डायवर्ट किया जाता है और ओवरफ्लो होने पर पंप के जरिए आगे निकाला जाता है। निगम का कहना है कि इन प्रयासों से कई अधिक गंभीर हॉटस्पॉट्स पर जलभराव की समस्या में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
मानसून में जलभराव से निपटने के लिए रिपोर्ट फ्लड डेप्थ फीचर वेबसाइट पर जोड़ा गया है, जिससे वाहन चालक पानी में गाड़ी डूबने की स्थिति की जानकारी साझा कर सकते हैं। साथ ही 10 जून तक 40 स्मार्ट सेंसर लगाए जाएंगे, जो जलभराव और सीवर ओवरफ्लो की स्थिति बताने में मदद करेंगे।
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यश जलुका, अतिरिक्त आयुक्त, नगर निगम गुरुग्राम