जिले में गणेश उत्सव की तैयारी जोरो पर...मिनी महाराष्ट्र की झलक होगी पेश
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। एमजी रोड स्थित एस्सेल टावर में रह रहे मराठी समाज ने इस वर्ष गणेशोत्सव को बेहद खास और भव्य बना दिया है। यहां की मराठी महिलाओं के एक समूह ने बप्पा को प्रसन्न करने के लिए भक्ति और अपने कला के हुनर का अद्भुत संगम पेश किया है। महिलाओं ने मिलकर सबसे पहले मैदा और सूखे मेवों से भरपूर पारंपरिक मोदक तैयार किए हैं, जिनकी संख्या 1100 से लेकर 5100 तक होगी। इस महाभोग को गणपति जी के चरणों में अर्पित किया जाएगा।
उत्सव के तीसरे दिन का आकर्षण सबसे अनूठा होने वाला है, जब विघ्नहर्ता को पूरे 56 अलग-अलग किस्मों के मोदक चढ़ाए जाएंगे। इन मोदकों में पारंपरिक स्वाद के साथ-साथ आधुनिकता का भी तड़का लगाया गया है। चॉकलेट, पान, काजू, रसमलाई, पनीर, खजूर, और आम जैसे लाजवाब फ्लेवर से सजे ये मोदक हर किसी का ध्यान खींच रहे हैं। इतना ही नहीं, महिलाओं की यह टोली बप्पा के लिए अलग से 56 प्रकार के छप्पन भोग व्यंजन भी तैयार कर रही है। यह भव्य आयोजन जिले में मिनी महाराष्ट्र की जीवंत झलक पेश कर रहा है।
सार्वजनिक गणेशोत्सव समिति के महिला मंडल की सदस्य ये चीजें तैयार कर रही हैं। पहला समूह शुभांगी माढ़ेेकर के नेतृत्व में परंपरागत मोदक तैयार कर रहा है। दूसरा समूह 56 अलग-अलग किस्म के मोदक बनाएगा, इनमें से एक-एक मोदक गणपति को अर्पित किया जाएगा। तीसरा ग्रुप 56 किस्म के व्यंजन बनाएगा। एक तरफ गणपति महोत्सव के लिए एक तरफ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारी हो रही है तो दूसरी व्यंजनों को बनाने में समूह जुटे हैं।
बाजार में फैली मोदक की खुशबू
गणपति की पसंद के मोदक गुरुग्राम की मिठाई की दुकानों में सज गए हैं। हालांकि, ये घरों में तैयार होने वाले पारंपरिक मोदकों से अलग हैं। मगर आकार में उन्हीं की तरह के हैं। इनमें खोया केसर, खोया, नारियल, गुलाब, काजू, ड्राई फ्रूट्स, चॉकलेट आदि के मोदक शामिल हैं। इनकी कीमतें 750 से लेकर 1500 रुपये प्रति किलो तक है।
मोदक में दिखेगा भक्ति और हुनर का रंग
हमलोग 56 किस्म के अलग-अलग मोदक तैयार करेंगे। गणेशोत्सव के तीसरे दिन महिलाओं के कार्यक्रम में इसे भोग लगाया जाएगा। हमारी भक्ति, संस्कृति और हुनर का रंग इसमें दिखेगा। - सुवर्णा जोशी
56 किस्म के मोदक के भोग का सिस्टम चार साल पहले मैंने ही शुरू कराया था। अब यह कार्यक्रम सार्वजनिक गणेशोत्सव का हिस्सा है। गणेशोत्सव हमें एक दूसरे से जोड़ता है।- स्वप्नजा तलेगांवकर
मुझे 56 भोग तैयार कराने की जिम्मेदारी दी गई है। इस उत्सव में व्यंजनों को तैयार करने को लेकर महिलाओं में काफी उत्साह रहता है जबकि काफी संख्या में महिलाएं कामकाजी भी हैं। - सुनीता डोके
हमलोग गुरुग्राम में पिछले 35 साल से सार्वजनिक गणेशोत्सव मना रहे हैं। हम महिलाएं घरों में मोदक तैयार कर रही हैं। हमने मिलकर पारंपरिक मैदे और ड्राईफ्रूट का मोदक तैयार किया। - शुभांगी माढ़ेकर