फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gurugram News: विंटेज कार रैली में दिखेंगी कई दुर्लभ गाड़ियां, तीन दिन रहेगी प्रदर्शनी

विज्ञापन
विज्ञापन
दिल्ली और गुरुग्राम में दिखेगा 125 विंटेज कारों का जलवा
विज्ञापन

21 से 23 फरवरी तक एंबियंस गोल्फ कोर्स में विंटेज और हेरिटेज मोटरसाइकिलों की प्रदर्शनी होगी आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। दिल्ली के इंडिया गेट से गुरुग्राम के एंबियंस ग्रीन्स गोल्फ कोर्स तक 21 फरवरी को दुर्लभ विंटेज कारों की रैली का आयोजन किया जा जाएगा। 21 गन सैल्यूट कॉनकोर्स डी एलीगेंस शीर्षक इस कार रैली का आयोजन 11वीं बार किया जा रहा है।
सबसे पहले वर्ष 2011 में इस तरह की पुरानी विंटेज कारों की रैली का आयोजन किया गया था। 21 से 23 फरवरी तक एंबियंस गोल्फ कोर्स में 125 दुर्लभ विंटेज कारों और 50 हेरिटेज मोटर साइकिलों की प्रदर्शनी देखी जा सकेगी। पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस रैली का उद्धाटन केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत करेंगे। प्रेसवार्ता में कार्यक्रम के आयोजक 21 गन सैल्यूट हेरिटेज एंड कल्चरल ट्रस्ट के संस्थापक और ट्रस्टी मदन मोहन ने बताया कि इस रैली में 1886 से 1975 तक विंटेज और क्लासिक कारें दिखेंगी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अपने देश को ग्लोबल हेरिटेज मोटरिंग टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित करना है।
विज्ञापन

अब तक जितनी विंटेज कार रैलियां गुरुग्राम में हुई हैं, उनमें हर बार अलग गाड़ियों को दर्शाया गया है। आने वाले दिनों में गुरुग्राम विंटेज और अन्य दुर्लभ पुरानी कारों का एक म्यूजियम बनाने की भी योजना है। इस बार की रैली में 1939 की डेलाहे (फिगोनी एट फलाशी) जैसी ऐतिहासिक कारें देखने को मिलेंगी। इसके अलावा रॉल्स रॉयस, बेंटले, कैडिलेक, फोर्ड और एस्टर मार्टिन जैसी गाड़ियां इस शो का हिस्सा बनेंगी।
खासतौर पर 1932 लैसिन ऑस्टुरा पिनिनफरीना, 1936 एसी 16/70 स्पोर्टस कूपे और 1948 की बेंटले मार्क 6 ड्रॉपहेड कूपे जैसी तीन दुर्लभ विंटेज कारें इस आयोजन में पहली बार पेश की जाएंगी। तीन सिल्वर कॉस्ट रॉल्स रॉयस ऐसी किसी आयोजन में पहली बार शामिल हो रहे हैं। 27 देशों से 35 ज्यूरी मेंबर इस आयोजन में हिस्सा लेंगे। विंटेज कारों की प्रदर्शनी के दौरान कथक, भरतनाट्यम, कथकली, राजस्थान, उत्तराखंड और हरियाणा के लोक नृत्यों का आयोजन किया जाएगा।
विज्ञापन

नया नहीं है ईवी का दौर
विंटेज और पुरानी कारों का संग्रह करने वाले मदन मोहन ने बताया कि 1945 तक भारत में दो तिहाई रॉल्स रॉयस कारें खरीदी जाती थीं। बड़ौदा की महारानी के लिए 1948 में बनी विंटेज इसका नमूना है। ऐसा मॉडल और ये शेड दोबारा प्रयोग नहीं लाया गया। यह ऐसी इकलौती कार थी। 1901 से 1907 तक बेंजीन से चलने वाली गाड़ियां बनती थीं। यह ईवी गाड़ियां ही थीं जिनका कांसेप्ट अब आया है। विश्वयुद्धों के दौरान तेल उत्पादक समूह की सक्रियता ने ऐसी कारों को उत्पादन बंद करा दिया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें