लेह में गहरी खाई में सेना के ट्रक के गिरने से हथीन के बहीन गांव के मनमोहन उर्फ मोनू शर्मा शहीद हो गए। मनमोहन की शहादत की सूचना मिलने पर उनके पिता बाबूराम का इतना बुरा हाल है कि वे न तो रो पा रहे हैं और न ही कुछ बता पा रहे हैं। अपने इकलौते बेटे की मौत का गम उनकी आंखों में साफ दिखाई दे रहा है। बहीन गांव ही नहीं पूरे जिले में मनमोहन के निधन पर शोक की लहर है। लोग घर पहुंचकर उनके पिता को सांत्वना दे रहे हैं।
वर्ष 2017 में सेना में हुए थे भर्ती
वर्ष 2017 में सेना में भर्ती हुए मनमोहन उर्फ मोनू शर्मा की ड्यूटी पिछले सात माह से लद्दाख में थी। 19 अगस्त को सेना का ट्रक मनमोहन सहित अन्य सैनिकों को लेह से नयोमा लेकर जा रहा था। पहाड़ियों पर चालक ने ट्रक को मोड़ा, तभी ट्रक अनियंत्रित होकर खाई में गिर गया। हादसे में मनमोहन सहित नौ सैनिकों की मौत हो गई।
घर की महिलाओं को नहीं दी गई जानकारी
इस बात की सूचना रविवार सुबह मनमोहन के घर गांव बहीन उसके पिता बाबू राम को मिली। सूचना मिलते ही उसके पिता बाबूराम के पैरों की जमीन खिसक गई। उन्होंने इस दुर्घटना की सूचना परिवार की महिलाओं को नहीं बताई, सिर्फ अपने भाइयों व परिवार के अन्य सदस्यों इसकी जानकारी दी। महिलाओं को घर के अंदर एकांत में रखा गया है, ताकि उन्हें मनमोहन की मौत की सूचना न मिले।
पिता का भी सपना था सेना में भर्ती होना
शहीद मनमोहन सिंह के पिता बाबूराम होडल में घड़ी बनाने का काम करते हैं। उनका सपना सेना में भर्ती होकर देश सेवा करना था, लेकिन घर की जिम्मेदारियों व अन्य कारणों से वे सेना में भर्ती नहीं हो पाए। अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए मनमोहन ने सेना में भर्ती होने का निर्णय लिया। जिससे उसके पिता बेहद खुश थे। शहीद मनमोहन के चचेरे भाई सुभाष ने बताया कि मनमोहन वर्ष 2017 में सेना में भर्ती हुआ था।
दो दिन पहले ही की थी वीडियो कॉल
शहीद मनमोहन के परिवार के ही सदस्य तथा मित्र जय प्रकाश ने बताया कि दो दिन पहले ही मनमोहन से उसकी वीडियो कॉल पर बात हुई थी। मनमोहन ने बातचीत में कहा था कि वह नवंबर में दीवाली की छुट्टी पर आएगा, लेकिन उसे क्या पता था कि उसकी आखिरी बार बात हो रही है। इतना कहते ही जय प्रकाश की आंखों से आंसू छलक उठे।
वॉलीबॉल का अच्छा खिलाड़ी था मनमोहन
मनमोहन वॉलीबॉल का अच्छा खिलाड़ी था। वॉलीबॉल प्रतियोगिता के लिए उसे प्रमुख रूप से बुलाया जाता था। उसके खेल को लेकर गांव के ही नहीं आसपास के इलाके के लोग उससे प्रभावित थे।
दो साल पहले हुई थी शादी
जवान मनमोहन की शादी दो साल पहले चंचल के साथ हुई थी। एक साल का उसका बेटा है। अप्रैल में छुट्टी पर आने के बाद बेटे को अपने करीब रखता था। परिवार के साथ पूरा समय व्यतीत करता था। मई में ही छुट्टी खत्म करके गया था।
शहादत की सूचना मिलते ही बहीन गांव के सरपंच विक्रम सिंह भी शहीद के घर पहुंचे। उन्होंने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने कहा कि शहादत पर उन्हें दुख है। साथ ही गर्व भी है कि एक युवा देश सेवा करते शहादत को पा गया। गांव बहीन ही नहीं आसपास के पूरे इलाके को उनके ऊपर गर्व है। गांव में शहीद के घर पहुंचने वालों का तांता लगा हुआ है। शहादत की सूचना पर उनके घर पहुंचने वालों में अशोक शर्मा, लवकुश रावत, राहुल रावत सहित समाज के सभी वर्गों के लोग शामिल रहे।