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Gurugram News: जब बच्चों का साहस बना पिता के लिए संजीवनी

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जंक फूड बन रहा लिवर का दुश्मन, स्क्रीन टाइम भी बढ़ा रहा फैटी लीवर की समस्या
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सौम्या गुप्ता
गुरुग्राम। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और जंक फूड की बढ़ता प्रचलन लिवर के लिए गंभीर खतरा बन गया है। गुरुग्राम जैसे हाई-टेक शहर में काम करने वाले युवा, देर तक काम और खराब खानपान के कारण फैटी लिवर जैसी बीमारियों की चपेट में हैं। 19 अप्रैल को विश्व लिवर दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि समय रहते संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली नहीं अपनाई गई, तो परिणाम घातक हो सकते हैं। लिवर दिवस के मौके पर अंगदान की सफलता की कहानियां भी सामने आईं, जहां बच्चों का साहस पिता के लिए संजीवनी बना।

बच्चों में बढ़ी फैटी लिवर की समस्या
बड़ों के साथ-साथ बच्चों में भी फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। शाम के समय बाहर का तला-भुना और मैदे से बनी चीजों का सेवन इसकी मुख्य वजह है। साथ ही, शारीरिक गतिविधि में कमी और बढ़ते स्क्रीन टाइम ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि घर का बना खाना और नियमित खेलकूद बच्चों के लिवर को सुरक्षित रखने के लिए अनिवार्य है।
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अंगदान कर दी नई जिंदगी
मैं श्रीनगर से गुरुग्राम आई और पापा को लिवर दान किया। डॉक्टरों ने जांच के बाद मुझे पूरी तरह स्वस्थ बताया। सफल ट्रांसप्लांट के बाद पापा को नई जिंदगी मिली। उन्हें स्वस्थ देखकर मुझे बेहद खुशी और संतोष महसूस हुआ। यह मेरे जीवन का सबसे खास अनुभव है। -साइका बशीर, लिवर डोनर


मैंने पापा को लिवर डोनेट किया, जिससे मुझे बहुत खुशी मिली। पहले यह काम कठिन लगता था, लेकिन अब संतोष है कि मैं उनकी मदद कर सका। उन्हें नई जिंदगी मिली, यह मेरे लिए सबसे बड़ा सुख है। -आशु राठी, लिवर डोनर, सेक्टर-5


बदलती जीवनशैली के कारण फैटी लिवर गंभीर रूप ले सकता है। खासकर बच्चों में बाहर का खाना इसकी बड़ी वजह बन रहा है। ऐसे में जरूरी है कि बच्चे नियमित शारीरिक गतिविधि करें और संतुलित, घर का बना भोजन लें। -डाॅ. अनुज गर्ग, लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन
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बच्चों के साथ बड़ों में भी लिवर की समस्याएं सामने आ रही हैं। रोजाना करीब चार से पांच मरीज ऐसे आते हैं, जिनमें बाहर के खानपान के कारण लिवर संबंधी दिक्कतें पाई जा रही हैं।-
डाॅ. काजल, फिजिशियन, नागरिक अस्पताल
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