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Gurugram News: जलभराव के कारण करीब एक दर्जन गांवों में जनजीवन अस्त व्यस्त

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- कहीं गांव बना टापू तो कहीं खेतों में मछली पकड़ते हैं किसान
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- लोगों के साथ पर्यावरण और पशुओं के लिए भी काल बन रहा जलभराव


संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। मानसून को गए चार महीने से अधिक का समय हो चुका है लेकिन मानसून के बाद जिले के तकरीबन एक दर्जन गांव ऐसे हैं जो अभी भी जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं। पुन्हाना के सिरौली में बाढ़ जैसे हालात है तो जहटाना रसूलुपर के खेतों में भी पानी भरा हुआ है। पानी की निकासी के लिए प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं। बारिश के समय में जलभराव और भी विकराल रूप ले लेता है लेकिन प्रशासन के अधिकारी लोगों की समस्या को अनदेखा करते रहते हैं। किसानों की लगातार मांग के बाद भी पानी निकासी को लेकर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है।


पुन्हाना के सिरौली, जैंवत गांव में अभी भी सैकड़ों एकड़ भूमि जलमग्न है तो जहटाना व रसूलपुर गांव में भी काफी खेतों में बरसात का पानी भरा हुआ है। जिले के सैकड़ों किसान जलभराव के कारण रबी की फसल की बिजाई नहीं कर पाए हैं। ऐसे में किसानों को अपने लिए अनाज तो पशुओं के लिए चारे की चिंता सताने लगी है। सिरौली गांव के वहीद, हाजी इशाक सहित जहटाना गांव के एजाज अहमद, दीनू, तौहिद, लखपत सेठ आदि लोगो का कहना है कि इस बार बरसात अधिक होने के कारण उनके खेतों से अभी तक पानी नहीं सूख पाया है। खेतों में तीन से चार फुट तक पानी भरा हुआ है। पानी की निकासी को लेकर प्रशासन द्वारा कोई इंतजाम नहीं किया गया। पिछले कई महीनों से पानी की निकासी को लेकर आवाज उठा रहे हैं लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। किसानोें का कहना है कि उनके जंगल नीचे होने के कारण आसपास के गावों का पानी यहां एकत्रित होता है।
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जिले का मुख्य शहर भी जलभराव से जूझने को मजबूर


नूंह शहर की बात करें तो जलभराव की चपेट में आए यासीन मेव डिग्री कॉलेज में ही 100 से अधिक पेड़ सूखकर नष्ट हो गए हैं। यही हाल उन स्थानों का है जहां जलभराव की स्थिति बनी हुई है। इसके अलावा लोगों को अन्य समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है। किसी के मकान में नुकसान हुआ है तो किसी की फसल की बिजाई नहीं हो पाई है।
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पशुओं को भी होती है परेशानी
कृषि और पशुपालन पर निर्भर मेवात में अधिकतर लोग कृषि करने के साथ पशु पालने का काम करते हैं। 2019 में हुई पशु गणना के अनुसार जिले में 1,74,867 भैंस व 30,088 गाय हैं। इसके अलावा अन्य सैकड़ों मवेशी भी जो घास पर निर्भर रहते हैं। जलभराव के कारण पशुओं को चारे की समस्या बनी हुई है। पालतू पशुओं को पशुपालक चारा दे देते हैं लेकिन लावारिश घूमने वाले पशुओं को इसके कारण काफी परेशानी होती है।
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तावडू में लोगों के घरों के साथ पुलिस भी है परेशान


तावडू क्षेत्र में जलभराव की समस्या स्थायी बनती जा रही है। नगर से बात करें तो सदर थाने में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के चलते हल्की सी बरसात होने पर ही मुख्य परिसर के आगे जलभराव हो जाता है। दो दिन पहले हुई बरसात का पानी सदर थाने में भरा हुआ है। ऐसे में फरियादियों को पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। इसके अलावा नगर पर सोहना रोड, बुराका पचगांव सड़क और हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में भी जलभराव होता है। खोरी कलां में राष्ट्रीय राजमार्ग 919 पर जलभराव की समस्या पुरानी है। बरसात के साथ-साथ घरों से निकलने वाला पानी भी सड़क पर बहता है। जिला मुख्यालय को जोड़ने वाली सड़क पर ग्राम पंचायत छारोड़ा और ग्वारका सीमा में सड़क पर बहता है। बरसात होने पर नई अनाज मंडी जलमग्न हो जाती है। इसी प्रकार क्षेत्र के सभी गांव में जलभराव और कीचड़ की समस्या है।

जहां पर भी जलभराव की समस्या है उसका तुरंत समाधान किया जाएगा। - संजय कुमार, एसडीएम पुन्हाना
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