गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण ने 105 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की, बादशाहपुर ड्रेन पर दबाव कम पड़ेगा
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने 105 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 4.3 किलोमीटर लंबी लेग-4 स्टॉर्म वाटर ड्रेन का संचालन शुरू कर दिया है। 1,400 क्यूसेक क्षमता वाली इस ड्रेन के चालू होने से न्यू गुरुग्राम के सेक्टरों में वर्षा जल की निकासी तेज होगी। इससे बादशाहपुर (लेग-3) ड्रेन पर दबाव कम पड़ेगा।
जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीसी मीणा ने बताया कि पिछले छह महीनों के दौरान इस परियोजना की साप्ताहिक समीक्षा और नियमित निरीक्षणों के माध्यम से लगातार निगरानी की गई। उन्होंने कहा कि लेग-4 ड्रेन हाल के वर्षों में जीएमडीए द्वारा विकसित सबसे महत्वपूर्ण स्टॉर्म वाटर परियोजनाओं में से एक है। इसका संचालन केवल एक बड़े इंजीनियरिंग कार्य का समापन नहीं है बल्कि गुरुग्राम के लिए बाढ़ राहत कार्यों की दिशा में यह ड्रेन लंबी अवधि के दौरान स्थायी समाधान देगी। इसके बनने से गुरुग्राम शहर के मुख्य रूप से सुभाष चौक, बख्तावर चौक, मेफील्ड गार्डन रोड, गुरुग्राम यूनिवर्सिटी रोड, आर्टेमिस हॉस्पिटल रोड, कन्हई चौक, सेक्टर 44, सेक्टर 68 से 80 तक के क्षेत्रों को लाभ होगा। यह ड्रेन बादशाहपुर ड्रेन पर बरसाती पानी के दबाव को कम करेगी।
सीईओ ने बताया कि लेग-4 रीइन्फोर्स्ड सीमेंट कंक्रीट (आरसीसी) बॉक्स ड्रेन का निर्माण वाटिका चौक से सेक्टर 37डी तक किया गया है, जहां ये रामप्रस्था सोसाइटी के निकट बादशाहपुर ड्रेन से जुड़ी है। इस ड्रेन की जल वहन क्षमता 1,400 क्यूसेक है। यह परियोजना सदर्न पेरिफेरल रोड (एसपीआर) क्षेत्र के तेजी से विकसित हो रहे इलाकों के लिए एक समर्पित जल निकासी चैनल के रूप में कार्य करेगी। जीएमडीए ने नाले में सीमित पानी छोड़कर इसका ट्रायल किया है, जिससे पानी निकासी की जांच की जा सके।
आवश्यकता अनुसार किया जा सकता है संचालित
इस परियोजना की एक प्रमुख विशेषता यह है कि वाटिका चौक पर बादशाहपुर ड्रेन के साथ जहां लेग-4 ड्रेन का मिलान होता है, वहां पर रेगुलेटरी गेट लगाया है। इससे आवश्यकता अनुसार संचालित किया जा सकता है। भारी बरसात के दौरान बादशाहपुर ड्रेन के अतिरिक्त पानी को इस गेट के माध्यम से लेग-4 में डाला जा सकता है। इससे बादशाहपुर ड्रेन ओवरफ्लो होने की संभावना कम होगी और संवेदनशील क्षेत्रों से वर्षा जल की निकासी अधिक प्रभावी ढंग से हो सकेगी।