मानव आवाज संस्था ने प्रदेश के पूर्व डीजीपी एसएन वशिष्ठ को गुडग़ांव का मुख्य सुशासन समन्वयक बनाने का विरोध किया है। उसका कहना है कि यह असंवैधानिक होने के साथ-साथ गुडग़ांव की जनता के साथ बड़ा छल है।
संस्था के संयोजक अभय जैन व प्रवक्ता बनवारी लाल सैनी ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में कहा कि हरियाणा सरकार गुडग़ांव के लोगों के साथ मजाक कर रही है। जैन ने कहा कि वशिष्ठ को गुडग़ांव के विभिन्न विभागों का समन्यवक बनाना यहां के स्थानीय मुद्दों से भटकाना है।
शहर को गुडग़ांव विकास प्राधिकरण (जीडीए) जैसे स्थिर विकल्प की जरूरत है। ताकि गुडग़ांव के विभागों का आपस में समन्वय स्थापित हो सके। संस्था ने चिंता प्रकट की है कि गुडग़ांव राज्य का करीब 50 फीसदी 30,000 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष आय देता हैं।
मगर सरकार गुडग़ांव की जनता के साथ प्रयोग ही कर रही हैं। यहां कानून-व्यवस्था काफी खराब है। यहां पर एसएचओ का ही अपहरण हो जाता हैं। यहीं नही थोड़ी सी बारिश में ही पूरा शहर घंटों तक जाम हो जाता है।
अभय जैन ने कहा कि सरकार का दावा है कि वशिष्ठ मात्र एक रुपया सैलरी पर ही काम करेगें जो तर्कसंगत नहीं हैं। वशिष्ठ को किसी अधिकारी या कर्मचारी को बर्खास्त या निलंबित करने का अधिकार नहीं होगा और न ही वह किसी की एसीआर लिख सकते है।
ऐसे में जिस अधिकारी का भय नहीं होगा और वह मात्र औपचारिकता के लिए उसको फाइल देगा। मानव संस्था ने मांग की है कि सरकार गुडग़ांव के साथ प्रयोग बंद कर उसके विकास के लिए सशक्त कदम उठाए। अभी तक भाजपा सरकार पूर्व सरकारों की भांति ही टालमटोल कर रही है।