1500 गज में ढाई साल में तैयार होगा भवन, 300 की क्षमता का ऑडिटोरियम
सरस्वती संग्रहालय, विभिन्न राज्यों के समन्वय केंद्र भारतीय भाषाओं के प्रशिक्षण केंद्र भी होंगे
29, 30 और 31 जुलाई को शिलान्यास समारोह कई राज्यों के राज्यपाल, भाषाविद्, कलाकार और संस्कृति कर्मी हिस्सा लेंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। भारत अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र देश की विभिन्न भाषाओं, लोक कलाओं, लुप्त हो रही सांस्कृतिक गतिविधियों का संरक्षण करेगा। इस केंद्र में जहां एक ओर देश भर के नाटय, लोक गीत, संगीत, शास्त्रीय नृत्य संगीत और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियां पूरे साल चलेंगी। वहीं यहां विभिन्न राज्यों की संस्कृति के अध्ययन के लिए एक समृद्ध पुस्तकालय होगा, जहां शोधार्थी देश के विभिन्न हिस्सों की संस्कृतियों पर शोध कर सकेंगे।
सेक्टर 9ए में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की 1500 वर्ग जमीन पर बनने जा रहे भारत सांस्कृतिक केंद्र का शिलान्यास हरियाणा के राज्यपाल बंडारु दत्तात्रेय 29 जुलाई को करेंगे इस मौके पर 3 दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। भारत सांस्कृतिक केंद्र के विभिन्न पहलुओं पर यह जानकारी इंटरनेशनल दिव्य परिवार सोसाइटी के महासचिव और चाणक्य वार्ता के संपादक डा. अमित जैन ने इस संबंध में आयोजित एक प्रेस वार्ता में दी।
इस मौके पर संगठन के संरक्षक लक्ष्मी नारायण भाला, समग्र हिंदू सेवा सेवा संघ के संरक्षक महासचिव महावीर भारद्वाज और श्रीमाता शीतला श्राइनबोर्ड के सदस्य ब्रह्म प्रकाश कौशिक ने कार्यक्रम में मौजूद थे।
अमित जैन ने बताया कि इंटरनेशनल दिव्य परिवार और चाणक्य वार्ता के चेयरमैन पूर्व रक्षा सचिव योगेंद्र नारायण है। सांस्कृतिक केंद्र की रूप रेखा तैयार करने से पहले वर्ष 2011 से लगातार कई देशों और देश के सभी राज्यों में टीम ने जाकर कार्यक्रम किए हैं और वहां की कला संस्कृति, भाषाओं को लेकर जानकारियां एकत्र की है। इस केंद्र में देश भर की भाषाओं का प्रशिक्षण केंद्र, 300 की क्षमता वाला एक ऑडिटोरियम, पुस्तकालय और अनुसंधान केंद्र और सरस्वती संग्रहालय भी होगा।
25 करोड़ के खर्च से बनने वाले इस केंद्र की योजना इस तरह से बनाई गई है कि अगले 100 सालों तक यह चलता रहे। इसमें राज्यों की सांस्कृतिक गतिविधियों के समन्वय के लिए एक केंद्र होगा। भारत की विविध प्राचीन विधाओं के संरक्षण, संवर्द्धन और प्रदर्शन की व्यवस्था रहेगी। इसमें योग, पंचकर्म, ध्यान, ज्योतिष, हस्तकला, नाड़ी विज्ञान, आयुर्वेद की प्राचीन विधाओं को सिखाने की व्यवस्था होगी। कौशल केंद्र होगा जिसमें मूर्ति कला, चित्र बनाना, वाद्य यंत्र बनाना, पेंटिंग आदि सिखाए जाने की व्यवस्था होगी। लक्ष्मी नारायण भाला ने कहा कि इसमें धर्म, पंथ को लेकर कोई भेदभाव नहीं होगा।
शिलान्यास समारोह में हरियाणा के राज्यपाल बंडारु दत्तात्रेय, बिहार के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर शामिल होंगे। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी शिलान्यास समारोह के समापन सत्र में शामिल होंगे। इस मौके पर विभिन्न सांस्कृतिक विषयों पर देश भर से आए विद्वानों द्वारा परिचर्चा, संवाद, नाटक, नृत्य और गीत संगीत के कार्यक्रम होंगे।