गुरुग्राम। देश-विदेश में इलाज के लिए मशहूर गुरुग्राम सिटी के नामचीन प्राइवेट अस्पतालों की लाचारी अब झलकने लगी है। यहां के सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों का 25 फीसदी स्टाफ कोरोना संक्रमित हो गया है। अब जो भी स्टाफ है वह 18-18 घंटे मरीजों के इलाज में जुटा हुआ है। ऐसे में ये कहना गलत नहीं होगा कि डॉक्टर और कर्मी कम है और मरीज कई गुना ज्यादा, तो कैसे होगा इलाज।
नागरिक अस्पताल को ही ले लीजिए, यहां के छह डॉक्टर सहित 25 फीसदी स्टाफ कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। कई डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ होम आइसोलेशन में है। जिसका असर ओपीडी पर पड़ने लगा है, बृहस्पतिवार को स्टाफ के बीमार होने के कारण मरीजों को ठीक से नहीं देखा जा सका। यही स्थिति यहां के प्राइवेट अस्पतालों की बनी हुई है। इनमें से अधिकांश अस्पतालों में महिलाओं की डिलीवरी को छोड़कर सभी तरह के ऑपरेशन बंद कर दिए गए हैं। अधिकांश अस्पतालों की सामान्य ओपीडी भी बंद कर दी गई है।
25 फीसदी मेडिकल स्टाफ के संक्रमित और आइसोलेशन में होने के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है। फिर भी सीमित स्टाफ के माध्यम से जनता को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रहीं हैं। ओपीडी की ऑनलाइन व्यवस्था कराई गई है जिसका जनता को लाभ मिलेगा।
- विरेंद्र यादव, सीएमओ
आज से ऑनलाइन ओपीडी शुरू
गुरुग्राम। जिला प्रशासन ने विषम परिस्थितियों में शहर एवं जिले के मरीजों के लिए निशुल्क ऑनलाइन ओपीडी शुरू कर दी है। जिसका समय सुबह 11 से दोपहर एक बजे तक का रखा गया है। इस अवधि में शहर के बड़े एवं एक्सपर्ट डॉक्टरों की ओर से लोगों को उपचार की सलाह बृहस्पतिवार से शुरू की गई है। पहले दिन कनेक्टिविटी की दिक्कत आई थी। कनेक्टिविटी न होने के कारण डॉक्टर और मरीजों के बीच ठीक से सुनाई नहीं दे रहा था। जिला प्रशासन का कहना है कि बृहस्पतिवार को पहला दिन था। इस कारण कुछ व्यवधान रहा है। शुक्रवार से यह प्रयास होगा कि कनेक्टिविटी ठीक हो और लोगों को उपचार के लिए बेहतर जानकारी दी जा सके।
सीएम ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से जाना गुरुग्राम की स्वास्थ्य सेवाओं का हाल
गुरुग्राम। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने चंडीगढ़ से गुरुग्राम जिले की स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में जानकारी की। इस दौरान कमिश्नर, डीसी और सीएमओ ने कहा कि प्रशासन बेहतर सेवाएं प्रदान करने के लिए पूरी तरह जुटा हुआ है। ऑक्सीजन की कमी नहीं होने दी जाएगी। जिन अस्पतालों में ऑक्सीजन नहीं थी, उन्हें मानेसर स्थित प्लांट से ऑक्सीजन की व्यवस्था कराई गई है। अभी तक ऑक्सीजन को लेकर स्थिति नियंत्रण में है। दवा आदि की व्यवस्था भी जरूरत के अनुसार, अस्पतालों को उपलब्ध करा रहे हैं। कहीं से भी यह शिकायत नहीं है कि अस्पताल में मरीज को दवा नहीं मिल रही है। जरूरत के अनुसार गंभीर मरीजों को बेड भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।