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Gurugram News: बारिश से अस्पताल बीमार

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सेक्टर-10 के नागरिक अस्पताल के बेसमेंट में भरा पानी, पैनल रूम होने से करंट का खतरा
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मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा खतरे में

संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल बीमार व्यवस्था का शिकार है। सोमवार और मंगलवार की बारिश के बाद नागरिक अस्पताल के बेसमेंट में पानी गया, जिससे मरीजों और डॉक्टरों की परेशानियां बढ़ गईं। बेसमेंट में पैनल रूम होने के कारण मरीजों और चिकित्सकों की सुरक्षा भी खतरे में हैं। यहां करंट का खतरा होने के कारण चिकित्सक भी बेसमेंट में जाने से परहेज कर रहे हैं।
नागरिक अस्पताल के बेसमेंट में बने डॉक्टरों के कक्ष, मेडिकल रिकॉर्ड रूम और अन्य महत्वपूर्ण विभागों में पानी भर गया है। सबसे चिंताजनक स्थिति पैनल रूम की है, जहां पानी घुसने से करंट का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। बिजली आपूर्ति से जुड़ा यह हिस्सा यदि प्रभावित होता है तो पूरे अस्पताल की व्यवस्था ठप हो सकती है।
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बढ़ी फिसलन की समस्या

जलभराव के कारण फर्श पर फिसलन बनी हुई है, जिससे मरीजों, तीमारदारों और स्टाफ को चोट लगने का खतरा बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों और अस्पताल के कर्मचारियों ने प्रशासन से मांग की है कि जलनिकासी की तत्काल व्यवस्था की जाए और अस्पताल के इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत कर मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।



शौचालयों का बुरा हाल
बेसमेंट में डेंगू वार्ड के नजदीक बने शौचालय का बुरा हाल है। देखकर ऐसा लग रहा है कि कई दिनों से सफाई नहीं हुई है। बदबू के कारण स्लाइड के जरिए नीचे से ऊपर जाना काफी मुश्किल हो गया है। पूरे रास्ते में बदबू फैलने से बीमार होने का खतरा बढ़ गया है।

वर्जन
बेसमेंट पानी निकासी के लिए मोटर लगाई हुई हैं। इसके अलावा मरम्मत कार्य भी जारी है, जलभराव के कारण डेंगू वार्ड पहले मंजिल पर शिफ्ट कर दिया गया है। इससे किसी को भी किसी भी समस्या का सामना न करना पड़े। - डाॅ. लोकवीर, पीएमओ
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सोहना के नागरिक अस्पताल की छतों से टपक रहा पानी
सोहना। मिलेनियम सिटी के अस्पताल की तरह सोहना के नागरिक अस्पताल में बारिश ने अव्यवस्थाओं की पोल खोल दी। बारिश का पानी छत से टपकता रहा है, जिससे मरीज और तीमारदार पूरी रात परेशान रहे। कस्बे में करीब 45 वर्ष पूर्व निर्मित नागरिक अस्पताल की बिल्डिंग जर्जर हालत में पहुंच गई है। सबसे बुरा हाल ओपीडी परिसर का है। यहां पर मरीजों को सावधानी से निकलना पड़ रहा है ताकि फिसलकर चोट न लग जाए। इसके अलावा छतों व दीवारों का प्लास्टर भी खराब हो गया है। हर समय प्लास्टर गिरने के कारण मरीज और स्टाफ चिंता में है। अस्पताल में पानी टपकने से मरीजों की संख्या भी कम होने लगी है। कई दिनों से ओपीडी करीब 200 हो रही है। जबकि इससे पूर्व 500 तक पहुंच जाती थी। मरीज चोट लगने के डर से अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं। अस्पताल के एसएमओ डॉ. रणविजय बताते हैं कि भवन के जर्जर होने के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। छतों की सफाई के बाद भी तीन दिनों तक पानी टपकता है। संवाद
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