फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gurugram News: हाई कोर्ट ने नूंह के जिला प्रमुख को अयोग्य घोषित किया

विज्ञापन
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने असंवैधानिक मानते हुए सरकार की भी कड़ी आलोचना की
विज्ञापन


संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में नूंह के जिला प्रमुख जान मोहम्मद को अयोग्य घोषित कर दिया है और उन्हें पद से हटाने का आदेश दिया। यह फैसला अधिवक्ता मोहम्मद अरशद के माध्यम से यहूदा मोहम्मद द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद आया है। उच्च न्यायालय के अधिवक्ता मोहम्मद अरशद ने बताया कि इस मामले में जान मोहम्मद के चुनाव की वैधता को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि उनकी नियुक्ति हरियाणा विलेज कॉमन लैंड (रेगुलेशन) एक्ट, 1961 की धारा 13C और 13D का उल्लंघन करती है।
याचिका में बताया गया कि जान मोहम्मद के खिलाफ 2004 में बेदखली का आदेश पारित हो चुका था, जिसे उन्होंने कभी चुनौती नहीं दी। यह बेदखली आदेश अपने आप में उन्हें अयोग्य ठहराने के लिए पर्याप्त है, क्योंकि हरियाणा पंचायत राज अधिनियम, 1994 की धारा 175(N) के तहत, किसी भी व्यक्ति के खिलाफ बेदखली आदेश पारित हो चुका हो तो वह पंचायत पद के लिए अयोग्य माना जाएगा।
विज्ञापन

21 साल बाद हरियाणा सरकार इस आदेश को नई जांच के जरिए रद्द करना चाहती थी, जो कि कानूनी रूप से अस्वीकार्य है। क्योंकि हरियाणा विलेज कॉमन लैंड (रेगुलेशन) एक्ट, 1961 में अपील के अलावा किसी भी प्रकार की पुनर्विचार प्रक्रिया की अनुमति नहीं है। हाईकोर्ट ने सरकार की इस मंशा को असंवैधानिक मानते हुए सरकार की भी कड़ी आलोचना की।
इससे पहले जान मोहम्मद ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच द्वारा उन्हें अयोग्य ठहराने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को वापस हाईकोर्ट भेजते हुए नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसके तहत, 20 फरवरी 2025 को हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज 17 मार्च 2025 को सुनाया गया।
अधिवक्ता ने बताया कि फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जान मोहम्मद कानूनी रूप से इस पद पर बने रहने के योग्य नहीं हैं। अदालत ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा उन्हें बचाने का प्रयास न केवल कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन है, बल्कि प्रशासनिक मनमानी का भी उदाहरण है।
-
याचिकाकर्ता यहूदा ने कहा कि उन्हें अदालत पर भरोसा था। जिस व्यक्ति ने पंचायती जमीन पर कब्जा किया हुआ हो। उसे किसी भी पंचायती संस्था में बने रहने का अधिकार नहीं है। अब तक सरकार के ढुलमुल रवैये के चलते लेट हुआ, लेकिन अदालत ने उन्हें न्याय दिया है जिसका वह स्वागत करते हैं।
क्या था मामला
पुन्हाना उपमंडल के गांव अकबरपुर के रहने वाले जान मोहम्मद जिला पार्षद के वार्ड-19 से चुनाव जीतकर जिला पार्षद बनने के साथ ही जिला पार्षदों के समर्थन व भाजपा के सहयोग से जिला प्रमुख बने। जिला पार्षद बनने के साथ ही उन पर पंचायत भूमि पर अवैध कब्जा करने के आरोप लग रहे थे। इसी को लेकर जिला पार्षद के वार्ड 4 से पार्षद यहूदा मोहम्मद ने हाईकोर्ट में याचिका डालकर जान मोहम्मद पर कार्रवाई की मांग की।
विज्ञापन


-
आज कोर्ट की तारीख लगी हुई थी। अभी उन्हें आदेशों की प्रति नहीं मिली है। आदेशों की प्रति मिलने के बाद ही स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकता है, जो भी निर्णय होगा मान्य होगा। - जान मोहम्मद
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें