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हरियाणा बोर्ड: बाहरवीं फिर पिछड़ गया मेवात, सिर्फ 45.75 फीसदी पास

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संवाद न्यूज एजेंसी
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नूंह : शिक्षकों की कमी, अभिभावकों की अनदेखी या फिर नकल रहित परीक्षा। कारण जो भी रहा हो, इस बार फिर हरियाणा बोर्ड की ओर से जारी 12 वीं के परीक्षा परिणाम में मेवात पिछड़ गया है। पूरे प्रदेश में मेवात सबसे निचले पायदान पर रहा है। यहां का परीक्षा परिणाम महज 45.75 पर सिमटकर रह गया। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, इस परीक्षा में जिला के सभी स्कूलों के 7 हजार 588 विद्यार्थी बैठे थे, जिसमें से 3 हजार 472 विद्यार्थी पास हुए और एक हजार 758 विद्यार्थियों की कंपार्टमेंट आई है। साथ ही, 2358 विद्यार्थी फेल हो गए हैं। यह परीक्षा परिणाम न केवल चिंता का विषय है बल्कि मेवात के विकास को गति देने में बड़ा अवरोधक है। जिस पर अभिभावक व अध्यापक से लेकर सरकार तक को ध्यान देने की जरूरत है। हालांकि पहली बार जिला प्रशासन ने बोर्ड परीक्षाओं को नकल रहित जरूर कराया है।

बता दें कि पिछले वर्ष बारहवीं की परिणाम करीब 48 प्रतिशत था, जो इस बार घटकर 46 प्रतिशत से भी कम रहा। जींद जिला परिणाम के मामले में प्रदेश में अव्वल रहा है। जींद जिले का परिणाम 91.05 प्रतिशत रहा है। जानकारों का मानना है कि परीक्षा परिणाम कम रहने का प्रमुख कारण जिले के स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। जिले में करीब 50 प्रतिशत शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं। सरकार भले ही नई शिक्षा नीति को लागू करके बेहतर शिक्षा की बात करती है। वहीं जिले के सरकार स्कूलों में शिक्षकों की कमी का पूरा नहीं किया जा रहा । जानकारों का कहना है कि जिन सरकारी स्कूलोें में शिक्षक भी हैं, वहां भी पढ़ाई पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिस कारण यहां पर शिक्षा स्तर लगातार गिर रहा है। अभिभावक भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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मेधावी को मिला मेहनत का फल
सिंगार वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय का परिणाम शतप्रतिशत रहा है। स्कूल के प्राचार्य के अनुसार 12 वीं कक्षा में 40 परीक्षार्थी ने परीक्षा दी थी। जिनमें से 33 परीक्षार्थी पास हुए, जबकि सात परीक्षार्थियों के कंपार्टमेंट हैं। स्कूल में छात्रा जैसमीन ने 90 प्रतिशत अंक लेकर ब्लाक में टाप किया है। जिला एफएलएन कार्डिनेटर कुसम मलिक ने बताया कि रावली सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्र दिलशान ने 96.80 प्रतिशत अंक लेकर जिले में कला संकाय में टाप किया है। उन्होंने बताया कि 2022-23 में दसवीं कक्षा में भी दिलशान प्रथम रहा था। दसवीं में उसने 97.80 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। दिलशान ने ज्योग्राफी और राजनीतिक विज्ञान में 100 में से 100 अंक प्राप्त किए हैं। वहीं हिंदी में 91, इंग्लिश में 94, इतिहास में 91तो उर्दू के 99 अंक प्राप्त किए है। दिलशान एक साधारण किसान का बेटा है जो प्रतिदिन नियमित रूप से स्कूल आता है। दिलशान ने कहा छात्र निरंतर मेहनत और लगन से पढ़े तो किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

ये हैं जिले का शैक्षणिक ढांचा :
जिले के स्कूलों में अधिकारियों से लेकर प्राइमरी स्कूल टीचर तक के करीब साढ़े चार हजार पद रिक्त हैं। सरकार की अनदेखी का यह आलम तब है जब केंद्र सरकार ने नूंह जिले को देश अति पिछड़े जिलों की श्रेणी में रखा है। जिले में 950 स्कूल हैं। जिनमें 126 सीनियर सेकेंडरी, 08 हाई स्कूल, 306 मिडिल स्कूल, 500 प्राइमरी स्कूल हैं तो पांच आरोही मॉडल तथा पांच कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय हैं। जिनमें करीब दो लाख छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही है। जिले की कुल साक्षरता दर लगभग 54 प्रतिशत है। जिसमें पुरुष साक्षरता दर लगभग 69 प्रतिशत है तो महिला साक्षरता दर 36 प्रतिशत है। मेव महिला साक्षरता दर करीब दस प्रतिशत है। यहां साक्षरता दर कम होने के गरीबी भी है। जिसके कारण नूंह जिला केंद्र सरकार के अति पिछड़े जिलों की श्रेणी में है। जिले में नौंवी से 12वीं कक्षा के शिक्षकों के 1564 पद हैं। जिनमें से 761 शिक्षकों के पद खाली हैं।
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उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने 12वीं कक्षा में उत्तीर्ण हुए छात्रों को शुभकामनाएं दी। परीक्षा परिणाम में पिछड़ जाने वाले बच्चों को भी भविष्य में अच्छी मेहनत के साथ तैयारी कर पुन: परीक्षा देने का आह्वïान किया। उन्होंने कहा हम कोशिश करेंगे स्टाफ की कमी को पूरा कराएं और अगले साल बेहतर परिणाम लाएं।
फोटो- दिलशाद।
- जैसमीन।
- कक्षा में पढ़ते हुए छात्र फाइल फोटो।
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