कहा- विकास के लिए प्रगति के साथ प्रकृति का जुड़ाव भी जरूरी, सेक्टर-54 में किया मातृ वन का शिलान्यास
750 एकड़ में विकसित होगा, नक्षत्र वाटिका, राशि वाटिका, कैक्टस गार्डन व बटरफ्लाई पार्क भी होंगे विकसित
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य और ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने कहा कि दुनिया भर में गुरुग्राम का नाम प्रगति के लिए लिया जाना जाता है लेकिन अब विकास के लिए प्रगति के साथ प्रकृति से भी जुड़ाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज इस दृढ़ संकल्प की भी आवश्यकता है कि हम न केवल पौधे लगाएंगे बल्कि उनकी पांच-छह सालों तक देखभाल भी करेंगे। उन्होंने यह बात शनिवार को गुरुग्राम के सेक्टर-54 में एक पेड़ मां के नाम अभियान की श्रृंखला में मातृ वन विकसित करने के उपलक्ष्य में आयोजित वन महोत्सव कार्यक्रम के दौरान कही।
उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ पौधरोपण करते हुए मातृ वन की आधारशिला रखी। हरियाणा के वन, पर्यावरण एवं वन्य जीव मंत्री राव नरबीर सिंह की पहल पर सेक्टर-54 के समीप अरावली पर्वतमाला में 750 एकड़ क्षेत्र में मातृ वन विकसित किया जाएगा। मातृ वन में छोटी काबुली कीकर को हटाकर बरगद, पीपल, गुल्लर, बेस पत्र, ईमली, पिलखन, नीम, बांस, फूल, औषधीय पौधे आदि लगाए जाएंगे। साथ ही मातृ वन में नक्षत्र वाटिका, राशि वाटिका, कैक्टस गार्डन व बटरफ्लाई पार्क भी विकसित होंगे।
गुरुग्राम का मातृ वन समय की आवश्यकता
मनोहर लाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक पेड़ मां के नाम लगाने की बात कही है। धरती को हरा भरा बनाने की इस पहल को हमें अपने संस्कारों में लाना चाहिए। गुरुग्राम के मातृ वन जैसी योजनाएं आज के समय की बड़ी आवश्यकता है। यह वन ने केवल गुरुग्राम बल्कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक के वातावरण को स्वच्छ करेगा। उन्होंने बताया कि कार्बन उत्सर्जन पर नियंत्रण के लिए ऊर्जा क्षेत्र में भी नवाचारों का बढ़ावा दिया जा रहा है।
हरियाली का नया अध्याय रचेगा मातृ वन
भूपेंद्र यादव ने कहा कि गुरुग्राम में 750 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जा रहा मातृ वन आने वाले समय में दिल्ली-एनसीआर के लिए ‘ग्रीन हार्ट’ की भूमिका निभाएगा। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक बनेगा, बल्कि हरियाली का नया अध्याय भी रचेगा। केंद्रीय मंत्री ने गुरुग्राम को आइडियल सिटी बनाने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि ग्रीन अरावली परियोजना के अंतर्गत पांच राज्यों के 29 जिलों में स्थानीय प्रजातियों की पौध तैयार की जा रही है और आइडियल नर्सरी मॉडल विकसित किया जा रहा है।
स्थानीय प्रजाति के पौधों को दी जाएगी प्राथमिकता
हरियाणा के वन, पर्यावरण एवं वन्य जीव मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि हम सौभाग्यशाली हैं कि दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला हरियाणा से होकर गुजरती है लेकिन इस पर्वत श्रृंखला में काबुली कीकर बहुतायत संख्या में होने के कारण पर्यावरण को उतना लाभ नही मिल पाता। ऐसे में वन विभाग हरियाणा की ओर से मातृ वन में स्थानीय प्रजाति के पौधों जैसे बड़, पीपल, नीम, गुल्लर आदि के रोपण को प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह हम सभी का साझा प्रयास है, जिससे आने वाले 10 वर्षों में सार्थक परिणाम देखने को मिलेंगे।
इस अवसर पर सोहना के विधायक तेजपाल तंवर, गुरुग्राम के विधायक मुकेश शर्मा, वन विभाग हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद मोहन शरण, हरियाणा बायो डायवर्सिटी, बोर्ड के चेयरमैन रणदीप सिंह जौहर, पीसीसीएफ (एचओएफएफ) विनीत गर्ग, पीसीसीएफ वन्यजीव विवेक सक्सेना, डीसी अजय कुमार, सीपी विकास अरोड़ा, नगर निगम गुरुग्राम के आयुक्त प्रदीप दहिया, नगर निगम मानेसर के आयुक्त आयुष सिन्हा, गुरुग्राम की मेयर राजरानी मल्होत्रा, गुरूग्राम वन संरक्षक सुभाष यादव, डीएफओ राजकुमार यादव, विपिन कुमार आदि अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं, बीजेपी के जिला अध्यक्ष सर्वप्रिय त्यागी, गुरुग्राम महानगर के अध्यक्ष अजीत सिंह सहित विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के पदाधिकारी उपस्थित रहे।