आठ तो इसी साल आए
सभी बांग्लादेशी इसके बाद गुरुग्राम में अलग-अलग झुग्गियों में रहकर मजदूरी का काम करना शुरू कर दिया। एटीएस से पूछताछ के दौरान अनवर हुसैन ने बताया कि वह और राजू उर्फ आलम 2007 में सुरंग से भारत में प्रवेश किया था। इसके बाद बाकियों ने भी प्रवेश करना शुरू कर दिया। इसी साल आठ बांग्लादेशी सुरंग के रास्ते आए थे।
झुग्गियों में रहकर कर रहे थे आरएमसी पाइपलाइन में काम
पकड़े गए बांग्लादेशी में से ज्यादातर झु़ग्गियों में रहकर एक ही श्रेणी के काम में शामिल हो गए। एटीएस की जांच में सामने आया है कि ज्यादातर बांग्लादेशी रेडी मिक्स कंक्रीट (आरएमसी) पाइपलाइन में काम करते थे। एटीएस यह भी जानने का कोशिश कर रही है कि यह सिर्फ आरएमसी में ही क्यों काम कर रहे थे।
आधार कार्ड से लेकर पासपोर्ट तक बनवा चुके है घुसपैठिये
एटीएस की जांच में पता चला कि 14 बांग्लादेशियों के पास भारत का आधार कार्ड बनवा चुके है। हालांकि इनके पास अभी कुछ आईडी बांग्लादेश की मौजूद है। एक घुसपैठिये ने तो पासपोर्ट तक बनवा लिया है। एटीएस इस मामले में यह भी जांच कर रही है कि पासपोर्ट बनवाने में किन-किन लोगों ने सहयोग दिया। इसके साथ ही आधार कार्ड तैयार कराने में भी स्थानीय स्तर पर कौन लोग मदद कर रहे थे।
सघन जांच करने की तैयारी में एटीएस
एक साथ 14 बांग्लादेशी पकड़ने पर एटीएस अब गुरुग्राम के अंदर सघन जांच करने की तैयारी में है। वह शहर में हो रहे बड़े स्तर पर निर्माणाधीन भवन में काम कर रहे मजदूरों की पहचान को लेकर जांच शुरू करेगी। इसके साथ ही शहर के सभी आरएमसी प्लांट पर भी निरीक्षण किया जाएगा। 14 बांग्लादेशी पकड़े जाने के बाद आशंका है कि नाम बदलकर या पहचान छुपाकर अन्य बांग्लादेशी भी शहर में काम कर रहे है।
पकड़े गए बांग्लादेशियों की पहचान
हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान मोहम्मद लुत्फुर रहमान (17), मोहम्मद राजू मियां (20), साकिब हुसैन (18), मोहम्मद तारेक उल इस्लाम (17), इलियास अली (18), मोहम्मद फेरुज इस्लाम (19), मोहम्मद अनारुल हक (30), साकिब राणा (19), गुलाम रब्बानी (23), मोहम्मद ज्वेल राणा (20), अनवर हुसैन (37), अरिफुल उर्फ अलाउद्दीन (22), मोहम्मद मसूद राणा के रूप में हुई है। (27) और राजू आलम (28) शामिल हैं।
सभी को वापस बांग्लादेश भेजा