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Gurugram News: कल से गुप्त नवरात्र, 24 घंटे खुलेंगे शीतला माता मंदिर के कपाट

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काफी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद, मंदिर प्रबंधन तैयारियों में जुटा
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। गुप्त नवरात्र बृहस्पतिवार से शुरू हो रहे हैं। इस दौरान श्री माता शीतला मंदिर के कपाट 24 घंटे खुले रहेंगे। मंदिरों में ज्यादा संख्या में भक्त आने के मद्देनजर मंदिर प्रबंधन तैयारियों में जुट गया है। प्रबंधन दूर दराज से रात के वक्त मंदिर आने वाले भक्तों को लेकर विशेष व्यवस्था कर रहा है। मंदिर के अधिकारी यज्ञ दत्त शर्मा ने बताया कि रविवार, सोमवार और मंगलवार को भक्तों की भीड़ ज्यादा रहेगी। मंदिर अगले 15 दिनों तक खुला रहेगा। आषाढ़ मेले में रौनक रहेगी।
माता शीतला हरियाणा के गांवों और दिल्ली-एनसीआर के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में काफी भक्तों की कुलदेवी हैं। लोग घरों में शादी, शिशु जन्म, मुंडन और अन्य शुभ कार्यों के बाद परिवार सहित माता के पूजन के लिए आते हैं। कई गांव के लिए एक बड़े समूह में चैत्र और आषाढ़ मेले में आते हैं।
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परंपरा के अनुसार लोग रात के वक्त मंदिर परिसर में रुककर भजन कीर्तन करते हैं। पिछले छह सालों से मंदिर का नया भवन निर्माणाधीन होने के कारण मंदिर परिसर का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा बंद कर दिया गया है। बाहर कोई शेड या ऐसी व्यवस्था नहीं है, जहां भक्त रुक कर भजन कीर्तन कर सकें। दूर दराज से आने वाले भक्तों को इस कारण काफी असुविधा हो रही है। मंदिर को पूरा होने में अभी एक से डेढ़ साल का समय लग सकता है।
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10 महाविद्या रूपों की होती है पूजा
आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष के पहले नौ दिन गुप्त नवरात्र होते हैं। 26 जून से 4 जुलाई तक गुप्त नवरात्र चलेंगे। इस दौरान मोक्ष प्राप्ति के लिए तंत्र साधना और देवी की विशेष पूजा का महत्व है। साल में चार बार देवी पूजा के लिए विशेष नवरात्र होते हैं। चैत्र महीने में वासंती नवरात्र और अश्विन महीने का शारदीय नवरात्र प्रकट नवरात्र कहलाता है। इसमें देवी के नौ रूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री रूप की पूजा होती है। माघ और आषाढ़ के महीने के शुक्ल पक्ष के नौ दिन गुप्त नवरात्र कहलाते हैं। इस दौरान देवी के नौ महाविद्या रूपों काली मां, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी देवी, छिन्न मस्तिका देवी, त्रिपुर भैरवी देवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमलात्मिका देवी की पूजा होती है। माता शीतला के दरबार में चैत्र और आषाढ़ के महीने में मेला लगता है।
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