युवक से ठगे थे 2.5 करोड़ रुपये, आरोपी मनीष ने बैंक मैनेजर से मिलकर खुलवाए थे खाते
विराट
गुरुग्राम। निवेश के नाम पर युवक से 2.5 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में अदालत ने मुख्य आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा है कि अगर आरोपी मनीष को जमानत दी जाती है तो समाज में गलत संदेश जाएगा। यह आदेश अतिरिक्त सत्र एवं न्यायाधीश सौरभ गुप्ता की अदालत ने दिया है। पीड़ित की शिकायत पर साइबर साउथ थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
विद्यासागर ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि 18 सितंबर 2025 को उनके पास व्हाट्सएप पर मीना जोशी ने संपर्क किया था। युवती ने कहा था कि वह आस्था सिक्योरिटी शेयर ट्रेडिंग के माध्यम से निवेश कर मोटा मुनाफा कमा सकते है। धीरे-धीरे उन्होंने 2.5 करोड़ रुपये तक निवेश कर दिए। ठगों ने उनसे कहा कि उनके निवेश गए रुपये पांच करोड़ से अधिक हो गए है। जब उन्होंने रुपये अपने खाते में भेजने के लिए कहा तो ठगों ने पहले कैपिटल टैक्स के नाम पर रुपये जमा करने के लिए कहा। तब उन्हें अपने साथ ठगी का एहसास हुआ।
पीड़ित के रुपये एक कंपनी के बैंक खाते में गए थे। पुलिस ने कंपनी के निदेशक मिलन थापा और शेर बहादुर को गिरफ्तार कर लिया। मामले की जांच में पता चला था कि स्टेट बैंक ऑफ गुजरात में काम करने वाले एक कर्मी अनूप की मदद से बैंक खाते खोलने के लिए नियमों को अनदेखा किया कर दिया जाता था। पुलिस ने जब आरोपी मनीष को गिरफ्तार किया तो उसके पास से पांच अन्य बैंक खाते जब्त किए गए थे। यह सभी खाते साइबर ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे थे।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि मनीष को इस मामले में गलत फंसाया जा रहा है। उसके पास से कुछ भी बरामद नहीं करना है। अभियोजन पक्ष ने याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि आरोपी इस मामले में मुख्य आरोपी है। आरोपी बैंक कर्मी की मदद से बिना दस्तावेज पूरा किए बैंक खाता खुलवा रहा था।