गुरुग्राम। 19 वर्ष पूर्व सोहना कस्बे में 389 कनाल, 17 मरला शामलात देह भूमि (सरकारी भूमि) को मिलीभगत कर निजी कंपनी को बेचने के मामले में अदालत ने तत्कालीन नायब तहसीलदार बाबूराम, मोहम्मद ईशाक, पूर्व पटवारी मोहम्मद सिद्दीकी, गिरदावर ओमप्रकाश, जयसिंह व सुमन छाबड़ा को तीन-तीन वर्ष कैद की सजा सुनाई है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अश्विनी कुमार शर्मा ने बुधवार को दिए फैसले में कहा कि सभी दोषियों को कड़ी सजा देना जरूरी है ताकि भ्रष्टाचार में लिप्त अन्य लोगों को संदेश मिल सके। उन्होंने कहा यह गंभीर मामला है।
जानकारी के मुताबिक, 12 अक्तूबर 2000 को हरियाणा राज्य चौकसी मुख्यालय चंडीगढ़ के आदेश पर राज्य चौकसी ब्यूरो ने सोहना स्थित 389 कनाल 17 मरला जमीन की जांच शुरू की थी। इसमें पाया कि सोहना निवासी सुशीला लाल ने जमीन को अपना हिस्सा बताकर मैसर्स दिल्ली टावर्स प्राइवेट लिमिटेड की सुमन छाबड़ा को 14.62 लाख में बेच दी। इसी प्रकार महिला सुशीला लाल ने 184 कनाल, 12 मरला की जमीन को फरीदाबाद के रविंद्र कुमार के माध्यम से बिल्डर को औने-पौने दाम में बेच दिया था।
इन दोनों मामलों की जांच में सुमन छाबड़ा ने क्षेत्र के पटवारी, गिरदावर व नायब तहसीलदार से कौड़ियों के दाम जमीन खरीदकर इसका म्यूटेशन भी चढ़वा दिया। जांच में पाया गया कि तत्कालीन गिरदावर ओमप्रकाश, नायब तहसीलदार बाबूराम, पटवारी टिपरचंद ने फर्जी रिकॉर्ड भी बनाया। दूसरे मामले में सुमन छाबड़ा व तत्कालीन नायब तहसीलदार मोहम्मद ईसाक व पटवारी मोहम्मद सिद्दीकी की भूमिका संदिग्ध पाई गई। ब्यूरो ने जांच रिपोर्ट के आधार पर 23 जून 2001 को सभी के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान सुशीला लाल व टिपरचंद पटवारी की मौत हो गई है। अदालत में पेश दस्तावेज और साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों को दोषी करार देते हुए सुमन छाबड़ा पर 25 हजार रुपये जुर्माना जबकि अन्य दोषियों पर 30-30 हजार का जुर्माना लगाया।