ऑटोमोबाइल व रियल एस्टेट सेक्टर के उद्यमियों ने सरकार से की सहयोग की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों के उछाल ने भारतीय उद्योगों की चिंता बढ़ा दी है। प्रोग्रेसिव फेडरेशन ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (पीएफटीआई) के चेयरमैन दीपक मैनी के अनुसार, वैश्विक अस्थिरता और बढ़ती उत्पादन लागत से अर्थव्यवस्था पर दबाव है। पिछले कुछ महीनों में लोहा, स्टील, एल्यूमिनियम और कॉपर जैसे कच्चे माल 15 से 35 फीसदी तक महंगे हुए हैं।
इससे ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग और निर्माण क्षेत्रों की लागत बढ़ गई है, जिससे वाहनों की कीमतें बढ़ने की आशंका है। संकट से निपटने के लिए संगठन ने केंद्र सरकार से ऊर्जा लागत नियंत्रण, निर्यात प्रोत्साहन और लॉजिस्टिक्स समर्थन जैसी राहत देने की मांग की है।
वर्जन
कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर केवल औद्योगिक उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि देश की विकास दर, उपभोक्ता मांग, रियल एस्टेट निवेश और रोजगार बाजार पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। -दीपक मैनी, चेयरमैन पीएफटीआई
हम लोगों ने बड़े उद्योगों से हमारे उत्पादों की कीमत पर रिविजन के लिए लिखा है। कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से लागत बहुत बढ़ गई है। ईंधन महंगा होने से परिवहन, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन लागत तेजी से बढ़ी है, जिसका असर उद्योग पर पड़ा है -मनोज जैन, सुप्रीम रबड़ इंडस्ट्री
हम लोग ऑटाेमोबाइल सेक्टर के इलेक्ट्रॉनिक पार्ट तैयार करते हैं। युद्ध से पहले वैश्विक सप्लाई चेन धीरे-धीरे स्थिर हो रही थी लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में समुद्री माल ढुलाई, बीमा प्रीमियम और आयात लागत में भारी वृद्धि ने उद्योगों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। -विनोद पहिलजानी, टेक्नोक्रेट कनेक्टिविटी सिस्टम
बढ़ती महंगाई और अनिश्चित आर्थिक माहौल के कारण उपभोक्ता अब बड़े खर्च और निवेश फैसलों को टालने लगे हैं। कॉमर्शियल सिलिंडर जो पहले 1700 रुपये में मिल रहे थे, अभी 3100 रुपये में हैं। उद्योगों में उत्पादन और निवेश की गति धीमी होती है तो रोजगार सृजन और बाजार मांग दोनों प्रभावित होते हैं, जिससे आर्थिक मंदी और गहरी हो सकती है। -पीके गुप्ता, अध्यक्ष पीएफटीआई गुप्ता हॉस्पीटेलिटी सर्विसेज