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Gurugram News: भारी वाहनों से ड्रेन को बचाने के लिए लगेंगे गेट और हाइट बैरियर

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जीएमडीए करेगा सुरक्षा, 71.03 लाख रुपये खर्च
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। शहर की मास्टर स्टॉर्म वाटर ड्रेन को भारी वाहनों से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने कवायद शुरू कर दी है। ड्रेन को पार करने के लिए बने कुछ रास्तों को गेट लगाकर बंद किया जाएगा, जबकि कुछ स्थानों पर हाइट बैरियर लगाए जाएंगे।
इसके लिए जीएमडीए ने लेग-1, लेग-2 और लेग-3 पर आरसीसी वेंटिलेटिंग गेट और हाइट बैरियर लगाने का टेंडर जारी किया है। प्रस्तावित कार्य पर जीएमडीए की ओर से 71.03 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। कार्य में आईएसएमबी स्टील सेक्शन/गर्डर का इस्तेमाल करते हुए आरसीसी वेंटिलेटिंग गेट और हाइट बैरियर लगाए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, कई स्थानों पर मास्टर ड्रेन को पार करने के लिए रास्ते बने हुए हैं। इन रास्तों से भारी वाहनों की आवाजाही होने से ड्रेन की संरचना को नुकसान पहुंचने का अंदेशा रहता है। ऐसे स्थानों पर हाइट बैरियर लगाए जाएंगे, ताकि भारी वाहन ड्रेन को पार न कर सकें। वहीं, जिन स्थानों पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोकना जरूरी है, वहां गेट लगाकर रास्ते बंद किए जाएंगे। यह कार्य करीब पांच-छह जगहों पर किया जाना है। एजेंसी को कार्य आवंटित होने के बाद इसे एक माह में पूरा करना होगा।
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साइबर सिटी में बरसाती पानी की निकासी के लिए तीन प्रमुख प्राकृतिक नाले हैं। लेग-1 ड्रेन सिकंदरपुर से पालम विहार होते हुए नजफगढ़ ड्रेन तक जाता है। लेग-2 सेक्टर-42 हुडा सिटी सेंटर से नजफगढ़ ड्रेन तक है। वहीं, लेग-3 ड्रेन घाटा गांव से वाटिका चौक, हीरो होंडा चौक और सेक्टर-99 होते हुए नजफगढ़ ड्रेन तक जाता है। इसे बादशाहपुर ड्रेन भी कहा जाता है। इन तीनों नालों के माध्यम से बारिश का पानी नजफगढ़ ड्रेन में पहुंचता है।
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जीएमडीए के कार्यकारी अभियंता विक्रम सिंह ने बताया कि मास्टर ड्रेन की सुरक्षा को देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है। रास्तों को नियंत्रित करने और भारी वाहनों की आवाजाही रोकने से ड्रेन की संरचना को नुकसान से बचाने में मदद मिलेगी।
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