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गैस : श्रमिकों के लिए 5 किलो के सिलिंडर उपलब्ध कराने की मांग

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श्रमिकों का पलायन रोकने के लिए शहर के औद्योगिक संगठनों ने कहा
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। शहर के औद्योगिक संगठनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि श्रमिकों के लिए 5 किलो के सिलिंडर उपलब्ध कराए जाएं। सबसे बड़ी समस्या श्रमिकों के पलायन को रोकने की है।
उद्यमियों ने कहा कि गुरुग्राम का औद्योगिक क्षेत्र इस समय एक गंभीर मल्टी-लेयर क्राइसिस से गुजर रहा है, जहां ऊर्जा संकट, श्रम पलायन, महंगी लॉजिस्टिक्स और कच्चे माल की कमी ने उत्पादन तंत्र को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। एलपीजी सिलिंडरों की भारी किल्लत और पीएनजी सप्लाई घटाने से उद्योगों की ऊर्जा आपूर्ति अस्थिर हो गई है। छोटे और मध्यम उद्योग, जो एलपीजी और पीएनजी पर निर्भर हैं, उन्हें उत्पादन घटाना या रोकना पड़ रहा है, जिससे समय पर ऑर्डर पूरे करना मुश्किल हो रहा है। प्रवासी श्रमिकों का पलायन उद्योगों की उत्पादन क्षमता को कमजोर कर रहा है।
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गुरुग्राम के उद्योग विहार और मानेसर के परिधान निर्यातक कई अन्य परेशानियों से भी जूझ रहे हैं। निर्यातकों ने कहा कि पश्चिमी एशिया युद्ध के चलते शिपिंग और ट्रांसपोर्ट में बाधाएं बढ़ गई हैं, जिससे निर्यात प्रभावित हो रहा है। वहीं घरेलू स्तर पर कूरियर, ट्रांसपोर्ट कंपनियों ने फ्यूल सरचार्ज के नाम पर दरें बढ़ा दी हैं, जिससे माल भेजना और मंगवाना महंगा हो गया है। टेक्सटाइल उद्योग के लिए आवश्यक सॉल्वेंट ऑयल, जो पेट्रोलियम उत्पाद है भी इस समय कमी और महंगाई का सामना कर रहा है, जिससे लागत और बढ़ रही है।

वर्जन
गुरुग्राम का उद्योग आज एक परफेक्ट स्टॉर्म में फंसा हुआ है। यदि जल्द ही एलपीजी-पीएनजी आपूर्ति सामान्य नहीं की गई, श्रमिकों को सस्ती गैस उपलब्ध नहीं कराई गई और लॉजिस्टिक्स लागत पर नियंत्रण नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर उत्पादन, निर्यात और रोजगार पर पड़ेगा। -कपिल साध, एसके ओवरसीज, वस्त्र-परिधान निर्यातक

जिला प्रशासन अपने स्तर पर आईओसीएल से टाई अप कर ले और 5 किलो वाला छोटा सिलिंडर श्रमिकों को उपलब्ध कराए। श्रम बहुल उद्योग में सबसे ज्यादा दिक्कत श्रमिकों के पलायन के कारण हो रही है। औद्योगिक इकाइयों या संगठनों को वे नियमबद्ध तरीके से उपलब्ध करा दें तो हमारे श्रमिक नहीं भागेंगे। -अश्विनी कुमार, महासचिव, चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज उद्योग विहार

गैस के लिए कोई सरकारी नियामक अथॉरिटी नहीं है। इसलिए रेट अलग-अलग है। ज्यादा खर्च करने पर पैनल्टी की समस्या आ रही है। गैस आधारित उद्योग कम उत्पादन कर पा रहे हैं दूसरी और श्रमिकों को घरेलू गैस नहीं मिल रही है। अभी तक घरेलू गैस ब्लैक करने वाला एक भी नहीं पकड़ा गया। -संजीव कपूर, इंडियन सिल्क टेक्सटाइल कंपनी निर्यातक, मानेसर
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श्रमिकों का सबसे बड़ा संकट है। प्रिंटिंग और डाइंग में पेट्रो केमिकल के रेट बढ़ने से लागत बढ़ गई है। गैस की खपत के लिए एक दिन में 150 एससीएम से ज्यादा खर्च करने पर खर्च करने पर 100 रुपये प्रति एससीएम पैनल्टी है। श्रमिकों को भोजन का संकट हो तो वे कैसे काम कर सकते हैं। -संजय कालरा, सान्या इंटरनेशनल परिधान निर्यातक
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