सोसाइटी की डी, ई और एफ टावर को रहने के लिए पहले ही असुरक्षित घोषित कर दिया गया था। ई और एफ को भी खाली करवाने की प्रक्रिया चल रही है। जिला उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष निशांत कुमार यादव ने आईआईटी, दिल्ली द्वारा जारी संरचनात्मक ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर जी टावर को रहने के लिए असुरक्षित घोषित किया था। उन्होंने दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा-144 के साथ-साथ आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 34 में निहित शक्तियों का प्रयोग करते टावर खाली करवाने के आदेश दिए हैं। आदेशों का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ आईपीसी की धारा 188 व आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51 से 60 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
10 फरवरी 2022 को डी टावर में हुए हादसे में दो महिलाओं की मौत हो गई थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने हादसे की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी थी। इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट नवंबर 2022 में सौंप दी थी। इसमें डी टावर को रहने के लिए असुरक्षित घोषित किया। बाद में ई और एफ को भी असुरक्षित घोषित किया। अब जी टावर को भी असुरक्षित माना गया है। सोसाइटी की नौ टावर में से चार टावर असुरक्षित घोषित कर दी गई हैं। ई और एफ टावर के अधिकांश फ्लैट मालिकों के मामले के निस्तारण की प्रक्रिया चल रही है।