2004 में हुडा ने अधिग्रहित की थी जमीन, बिछ चुका है सड़कों का जाल
उपायुक्त ने पूरी रिपोर्ट शासन को भेजी
मयंक तिवारी
गुरुग्राम। प्रदेश सरकार की फर्जी कैबिनेट की बैठक का हवाला देकर बादशाहपुर के पास आठ एकड़ की जमीन को किसान रिलीज कराना चाहता था। उपायुक्त की ओर से राजस्व रिकार्ड के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी गई है।
हुडा की ओर से अधिग्रहित जमीन को रिलीज कराने के फर्जी कैबिनेट प्रस्ताव का मामला गरमाता जा रहा है। भू-माफिया की ओर से ऐसे जमीन मालिकों से साठ-गांठ कर फरीदाबाद, रोहतक व गुरुग्राम सहित अन्य स्थानों की जमीन को रिलीज कराया जाना था। इसी क्रम में बादशाहपुर गांव के बगल में घसोला गांव है, जिसमें एक किसान की आठ एकड़ जमीन को रिलीज किया जाना था। यह जमीन हुडा ने 2004 में अधिग्रहित किया था। राजस्व रिकार्ड में यह हुडा के पास है। किसान की ओर से हाईकोर्ट में मुकदमा चल रहा था। इसी बीच जमीन को रिलीज कराने के लिए एक फर्जीवाड़ा हुआ। जिसमें कैबिनेट की फर्जी बैठक और उक्त जमीन को रिलीज करने के बिंदु तैयार किए गए। उस आधार पर उपायुक्त गुरुग्राम निशांत यादव से रिपोर्ट मांगी गई। जिसकी जांच में यह खुलासा हुआ कि कैबिनेट में इस तरह का कोई प्रस्ताव ही नहीं रखा गया। कैबिनेट की इस तारीख में कोई बैठक नहीं हुई। उपायुक्त ने उक्त जमीन की विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी है।
प्रदेश स्तर पर हुए फर्जीवाड़े की जांच डीजी सीआईडी आलोक मित्तल व डीजीपी शत्रुजीत कपूर की टीम कर रही है। इस मामले में कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसका पता लगाया जा रहा है। किसानों के संपर्क में कौन सा बिल्डर है, इसकी जांच चल रही है। गुरुग्राम की जो आठ एकड़ जमीन रिलीज कराई जानी थी, उसकी कीमत अरबों में बताई जा रही है।
जिस जमीन को रिलीज कराए जाने के लिए फर्जीवाड़ा हुआ है, वह जमीन 20 साल से हुडा के पास है। इसकी विस्तृत रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जा चुकी है। - निशांत यादव, उपायुक्त , गुरुग्राम।