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अरावली में वन्य जीवों की प्यास बुझाएंगे गजरल

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गुरुग्राम (पवन कुमार सेठी)। भूजल स्तर उठाने और वन्य जीवों की प्यास बुझाने के लिए वन विभाग अरावली में गजरल बनाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के तहत गांव घाटा से इसकी शुरुआत की जाएगी। योजना सफल रहने पर यह गजरल पूरी अरावली में बनाए जाएंगे।
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अधिकारियों के मुताबिक, गुरुग्राम का भूजल स्तर 100 मीटर तक पहुंच गया है। यह काफी गंभीर स्थिति है। मानसून में बरसात पर्याप्त होने पर भी भूजल संचयन नहीं हो पा रहा। मानसून के कुछ समय बाद ही वन्य जीव पानी की तलाश में भटकते हुए अरावली से बाहर आ जाते हैं। कई बार ये आबादी के बीच आकर लोगों पर हमला कर देते हैं या किसी दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं। जीवों को बचाने के लिए विभाग ने गजरल बनाने का निर्णय लिया है। इन गजरल में काफी मात्रा में पानी एकत्र किया जा सकता है। अरावली की जमीन भूड़ मिट्टी है। इसमें पानी को अपने अंदर सोखने की क्षमता है।
जिले में दो दिन में हुई करीब 250 एमएम बारिश के पानी को अरावली में नहीं रोका जा सका। यह अरावली से तेजी से बहता हुआ शहर में पहुंचा और गोल्फ कोर्स रोड पर अंडरपास पूरी तरह जलमग्न हो गया था। गजरल बन जाने से अरावली का पानी अंदर ही संरक्षित हो जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के तहत ये गजरल सितंबर महीने के अंत तक ही तैयार करने का लक्ष्य है।
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वन विभाग के रेंज अधिकारी कर्मबीर सिंह ने बताया कि गजरल तालाबनुमा होता है। रेंप की तरह यह ढलान में गहरा होता जाता है। इससे कम स्थान पर अधिक पानी एकत्र करने में मदद मिलती है। वन्य जीव पानी पीने के लिए गजरल की ऊपरी सतह से आते हैं। पानी का स्तर जैसे-जैसे कम होगा, वैसे-वैसे वन्य जीव प्राकृतिक रैंप से नीचे की तरफ उतरते हुए पानी पीते हैं। वन्य जीवों को गजरल पर ही शिकार करने का मौका भी मिल जाता है।
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