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Gurugram News: एक्सप्रेसवे की राह में आ रहे पेड़ों की जिंदगी बचाने की कोशिश में जुटा वन विभाग

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उमंग भारद्वाज चौक से रेवाड़ी तक बन रहा है एक्सप्रेसवे, एनएचएआई ने वन विभाग से 500 से अधिक पेड़ों को हटाने का किया अनुरोध
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वन विभाग पेड़ों का प्रत्यारोपण करने के लिए निरीक्षण में जुटा



अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। शहर के उमंग भारद्वाज चौक से शुरू होकर रेवाड़ी तक बनने वाले 46 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे के लिए रास्ते में आ रहे 500 पेड़ों को बचाने के लिए वन विभाग योजना बना रहा है कि कितने पेड़ ऐसे हैं जिनको यहां से हटाकर दूसरी जगह प्रत्यारोपित किया जा सकता है। अगर 50 फीसदी पेड़ भी प्रत्यारोपण के मानकों पर खरे पाए गए तो यह बड़ी सफलता होगी।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इसके लिए सड़क के किनारे बने फार्म हाउसों की जमीन का अधिग्रहण किया था। अब इन फार्म हाउसों में लगे करीब 500 पेड़ों को हटाने के लिए वन विभाग से अनुरोध किया है। पिछले दिनों वन विभाग की एक टीम ने साइट पर जाकर निरीक्षण भी किया था। अनुमित मिलने के बाद परियोजना का काम गति पकड़ जाएगा।
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वन विभाग के मुताबिक यह फार्म हाउस गढ़ी हरसरू के पास स्थित हैं। इनके मालिकों ने यहां पर करीब ढाई-तीन दशक पहले पेड़ लगाए थे। इनमें अलग-अलग किस्म के पेड़ हैं। इनमें नीम, बेर, पीपल, आम, इमली, जामुन, अर्जुन आदि शामिल हैं। वन विभाग ने इन पेड़ों की जांच में पाया कि यह तीस वर्ष पुराने हैं। इस बात की भी जांच की जा रही है कि इन पेड़ों में कितने ऐसे हैं जिनको प्रत्यारोपित किया सकता है।

जुलाई 2020 में शुरू हुआ था निर्माण
गुरुग्राम-पटौदी-रेवाड़ी एक्सप्रेसवे का निर्माण जुलाई 2020 में शुरू हुआ था और दिसंबर 2022 में पूरा होने वाला था लेकिन पर्यावरणविद इस योजना के खिलाफ राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में चले गए। इसके बाद सितंबर 2022 में इसको रोकना पड़ा। एनएचएआई ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सर्वोच्च अदालत ने अप्रैल 2023 में प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करने की अनुमति दी। पूरा होने पर पटौदी-रेवाड़ी एक्सप्रेसवे द्वारका एक्सप्रेसवे और फिर सेक्टर-84 रोड से भी जुड़ जाएगा। वन विभाग रेंज अधिकारी करमवीर सिंह कहते हैं कि पूरी कोशिश होगी कि अधिक से अधिक पेड़ों को प्रत्यारोपित किया जाए। इसके लिए गहन सर्वेक्षण किया जा रहा है। पेड़ों के रोपण से पहले उस जमीन की भी जांच की जाएगी जिस जमीन में पेड़ों को रोपा जाएगा।
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घर के बुजुर्गों की याद में लगाए थे पेड़

गढ़ी हरसरू पर ही एक फार्म हाउस के मालिक कहते हैं कि उन्होंने करीब 25 साल पहले घर के बुजुर्गों की याद में पेड़ लगाए थे। इनसे गहरा लगाव है। देखरेख में इन पेड़ों को बड़ा किया है। वन विभाग से अनुरोध किया है कि वह इनको उचित जगह प्रत्यारोपण कर दे। इसका खर्च भी वह वन विभाग को देने के लिए तैयार हैं।
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